मुख्यमंत्री के अपने गुट के नेता ही कार्यप्रणाली से नाराज होकर दूसरे गुटों में हुए शामिल, अपनों के विरोध से अलग-थलग पड़े सुक्खू – जम्वाल
बोले – दूसरों को गुटबाजी का पाठ पढ़ाने वाले मुख्यमंत्री अब अपनी ही पार्टी के गुटों में घिरे, जनता को झूठी और भ्रामक बातों में उलझाने का आरोप
मंडी। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सुन्दरनगर के विधायक राकेश जम्वाल ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी अब इस स्तर तक पहुंच गई है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अपने ही गुट के नेता उनके खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को मुख्यमंत्री ने अपने साथ रखा, जिन पर भरोसा जताया और जिन्हें मंत्री पद तक दिया, आज वही उनकी कार्यप्रणाली से नाराज होकर दूसरे गुटों के साथ मिलकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि कांग्रेस के भीतर असंतोष कितना गहरा हो चुका है और मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं।
राकेश जम्वाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू लगातार गुटबाजी का राग अलापते रहे, लेकिन उन्हें यह पता ही नहीं चला कि कब उनके अपने गुट के नेता ही उनसे नाराज होकर दूसरे गुटों में चले गए। दूसरों को गुटबाजी का पाठ पढ़ाने वाले मुख्यमंत्री आज अपनी ही पार्टी के गुटों के बीच घिर गए हैं। जिन नेताओं को कभी उनका करीबी और समर्थक माना जाता था, उनका ही विरोध अब मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। जब अपने ही गुट के नेता साथ छोड़कर दूसरे गुटों में जाने लगें, तो मुख्यमंत्री को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी कार्यशैली पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस में गुटों की लड़ाई अब बंद कमरों तक सीमित नहीं रही। कभी दिल्ली में मुख्यमंत्री के खिलाफ लामबंदी दिखाई देती है, कभी अलग-अलग बैठकों के जरिए शक्ति प्रदर्शन होता है, तो कभी कैबिनेट बैठकों के बहिष्कार जैसी घटनाएं सामने आती हैं। रामपुर में मुख्यमंत्री के धुर विरोधियों के साथ हुए शक्ति प्रदर्शन में कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पूर्व सीपीएस रहे नीरज भारती की मौजूदगी भी पार्टी के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े करती है। ये घटनाक्रम संकेत देते हैं कि मुख्यमंत्री के खिलाफ विरोध केवल दूसरे गुटों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अपने खेमे के नेताओं में भी असंतोष बढ़ रहा है।
जम्वाल ने आरोप लगाया कि अपनी ही पार्टी में बढ़ते विरोध और कमजोर पड़ती राजनीतिक पकड़ से ध्यान हटाने के लिए मुख्यमंत्री जनता को झूठी और भ्रामक बातों में उलझाने में व्यस्त हैं। प्रदेश की जनता महंगाई, बढ़ते करों और विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं से परेशान है, लेकिन मुख्यमंत्री इन सवालों का जवाब देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में उलझे हुए हैं। जनता को राहत देने और प्रदेश के विकास पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय सरकार अपनी ही पार्टी के गुटों की खींचतान में फंसी हुई है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली से नाराज होकर उनके अपने गुट के नेताओं का दूसरे गुटों के साथ खड़ा होना कांग्रेस के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिन नेताओं को साथ लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी राजनीतिक ताकत बनाई, आज उन्हीं नेताओं का विरोध उनके लिए चुनौती बन रहा है। कांग्रेस के भीतर कौन किस गुट में है और कौन किसके खिलाफ मोर्चा खोल रहा है, यह पार्टी की अंदरूनी स्थिति को उजागर करने के लिए काफी है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त भी सरकार के लिए चेतावनी है। जनता ने अपने जनादेश से नाराजगी का संकेत दिया है और यह 2027 के विधानसभा चुनावों का ट्रेलर है। मुख्यमंत्री ने चार साल तक जनता की समस्याओं को नजरअंदाज किया और अब अंतिम वर्ष में घोषणाओं का बाजार सजाने की तैयारी की जा रही है। लेकिन जनता अब केवल घोषणाओं और भ्रामक दावों से संतुष्ट होने वाली नहीं है।
जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस की कथनी और करनी के बीच का अंतर सामने आ चुका है। मुख्यमंत्री को दूसरों को गुटबाजी का पाठ पढ़ाने के बजाय यह जवाब देना चाहिए कि उनके अपने गुट के नेता उनसे नाराज क्यों हैं और दूसरे गुटों के साथ मिलकर उनके खिलाफ क्यों खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस के गुटों की यह लड़ाई बता रही है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है और मुख्यमंत्री अपने ही नेताओं का भरोसा खोते जा रहे हैं। वर्ष 2027 में प्रदेश की जनता कांग्रेस की गुटबाजी, सरकार की कार्यप्रणाली और अधूरे वादों का जवाब अपने वोट से देगी।
