Spread the love

शिमला। डीए, एरियर और अन्य मुद्दाें काे लेकर‌ राज्य सचिवालय के कर्मचारियाें का सालाें से दबा गुबार आखिर आज बाहर निकल ही गया। कर्मचारियाें की छाेटी-छाेटी समस्याएं आज इतनी बड़ी हो गई कि सचिवालय के तमाम कर्मचारी एक आवाज में अपने कार्यालयों से बाहर निकल आए। 

हिमाचल प्रदेश सचिवालय में कार्यरत सभी श्रेणियों के कर्मचारियों ने बुधवार को आम सभा कर यहां की सभी पांचों संघों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस आम सभा में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर अपना गुबार निकाला। इसमें क्लास वन से लेकर क्लास फाेर तक के सभी कर्मचारी नेता शामिल थे। यह आमसभा प्रदेश सचिवलाय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले आयाेजित किया गया और इसे दूसरे अन्य विभागाें के कर्मचारी संघाें का भी समर्थन मिला। 

प्रदेश सचिवालय के प्रांगण में करीब डेढ़ बजे शुरू हुआ यह आमसभा तीन बजे तक चली। इसमें सभी संघाें के नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली काे जमकर काेसा। कर्मचारी नेताओं के निशाने पर मुख्यमंत्री के साथ उनकी सारी अफसरशाही, सलाहकार, ओएसडी, मंत्री थे। शुरूआती ताैर पर मुद्दा डीए-एरियर काे लेकर था, लेकिन उसमें कर्मचारियाें की और भी मांगें जुड़ती चली गई। 

 इस आमसभा के बहाने कर्मचारी नेताओं ने सुक्खू सरकार की व्यवस्था परिवर्तन पर खूब हल्ला बाेला और खीब तंज कसे। उन्होंने कर्मचारियाें के नाम पर बार-बार लिए जा रहे लोन के मामले पर भी सरकार काे घेरा और कहा कि यह पैसा सरकार अपने ऐशाेआराम पर खर्च कर रही है। अधिकारियाें काे पुन: राेजगार देने के मामले पर नेता काफी नाराज दिखे। इसके अलावा सरकारी गाड़ियाें के दुरुपयोग मामले पर सरकार नेताओं के निशाने पर थी। सचिवालय की रेनाेवेशन पर खर्च किए जा रहे कराेड़ाें रुपए पर कर्मचारी नेता नाराज दिखे और सब ने अपने-अपने तरीके से सरकार के प्रति नाराजगी जताई।

मांगें न मानी ताे अनशन पर बैठेंगे – संजीव शर्मा

प्रदेश सचिवालय कर्मचारी संघ के प्रधान संजीव शर्मा ने कहा कि अगर सरकार ने उन्हें वीरवार काे वार्ता के लिए नहीं बुलाया ताे 23 अगस्त काे दाेबारा आमसभा हाेगी। उन्हाेंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद  10 सितंबर काे प्रदेश सचिवालय कर्मचारी संघ मास कैजुअल लीव पर जाएग। अगर फिर भी बात न मानी ताे वह अनशन पर बैठेंगे। उन्हाेंने खेद जताते हुए कहा कि सरकार के पास कर्मचारियाें काे देने के लिए पैसे नहीं है और उनके अधिकारी 50 लाख रुपए की गाड़ी में घूम रहे हैं। सचिवालय में मुख्यमंत्री कार्यालय के रेनाेवेशन के लिए 19 कराेड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव तैयार कर दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से गौर करे और उन्हें माने।

बीबी-बच्चाें काे घुमा रही गाड़ियां, कर्मचारियाें के लिए नहीं है पैसा- टेकराम

प्रदेश सचिवालय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के प्रधान टेक राम ने कहा कि सरकार के पास कर्मचारियाें काे देने के लिए पैसे की कमी आड़े आ रही है, लेकिन अपने एशाेआराम के लिए पैसे की काेई कमी नहीं है। सरकारी गाड़ियां अफसराें की बीबी और बच्चाें काे ढाे रही हैं। तब पैसे की कमी नहीं है। उन्हाेंने कहा कि अगर सरकार अपने खर्चाें पर राेक लगाए और सप्ताह में पांच दिन ही गाड़ी चलाने का फैसला ले ताे सरकार इससे लाखाें रुपए बचा सकती है। वर्ना प्रदेश की हालत काे बांग्लादेश जैसे बनने से काेई नहीं राेक सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने सलाहकाराें की फाैज खड़ी करके रख दी है, लेकिन काेई भी ढंग की सलाह नहीं दे रहे। माननीयाें काे दाे-दाे गाड़ियां दी गई हैं। उन्हें एचआरए 60 हजार रुपए दिया जा रहा है और कर्मचारियाें काे सिर्फ 250 रुपए मिल रहा है।

अगर यही व्यवस्था परिवर्तन है ताे नहीं चाहिए – अमर सिंह

सचिवालय चालक संघ के प्रधान अमर सिंह ने कहा कि अपनी मांगाें काे लकर प्रदेश सचिवालय में 18 साल बाद सभी कर्मचारी यूनियनों की आमसभा हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियाें के नाम पर लाेन ले रही है, लेकिन वित्तीय देनदारियां चुकता नहीं कर रही। उन्होंने आराेप लगाया कि अफसरशाही के ऐशाेआराम के लिए कर्मचारियाें का वेतन से यह पैसा काटा जा रहा है। बेराेजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है, सरकार अधिकारियाें काे रि-इम्पलायमेंट दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि यही व्यवस्था परिवर्तन है ताे नहीं चाहिए ऐसा व्यवस्था परिवर्तन। सरकारी गाड़ियां मैम साहब और बच्चाें काे ढाे रही है। उन्होंने कहा कि सीएम अधिकारियाें काे एक गाड़ी देने का आदेश करे। वहीं, सप्ताह में पांच दिन ही गाड़ी चलाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे लाखाें बचेंगे और कर्मचारियाें की देनदारियां चुकती हाेगी।

सफेद हाथी बैठाए हैं, क्या काम किया रिपाेर्ट ले सरकार – बाेध राज 

सचिवालय में पीए प्राइवेट सेक्रेटरी संघ के प्रधान बाेधराज ने कहा कि आज कर्मचारी मजबूर हाेकर बाहर निकला है। उन्होंने कहा कि यह काहे का व्यवस्था परिवर्तन है। अगर सरकार समय पर नहीं संभली ताे उनका ही परिवर्तन हाे जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने सफेट हाथी बैठा रखे हैं। एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन दी जा रही है। वह क्या काम कर रहे हैं, सरकार इसकी रिपाेर्ट ले। उन्होंने सरकार काे घेरा और कहा कि ओएसडी और एडवाइजराें की फाैज खड़ी करके रख दी है। क्या सलाह दे रहे हैं समझ से परे है। आज कर्मचारी हाशिए पर आ गया है। बाेर्ड और निगमाें में अध्यक्षाें काे सचिवालय में बैठा दिया है। उन्हें चार-चार गाड़ियां दी गई हैं। रेनाेवेशन के नाम पर कराेड़ाें खर्च करने के लिए पैसे हैं, लेकिन कर्मचारियाें काे उनका हक देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है।

उधर, गीता ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सचिवालय का कर्मचारी जाे सरकार और प्रदेश काे चला रहा है उनकी दुर्दशा करके रख दी है। उन्होंने कहा कि बाहर से आए ब्यूराेक्रट्स कभी हमारे नहीं बनेंगे। उन्होंने इन पर पक्षपात करने का आराेप भी लगाया।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *