शिमला। पूर्व राष्ट्रपति व शिक्षाविद स्व. सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन की जयंती के दिन कांग्रेस सेवादल ने केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति का विरोध करते हुए इसकी प्रतियों को जलाया। कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के बाहर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप राठौर भी इस दौरान मौजूद थे। राठौर और अन्य पार्टी नेताओं ने प्रदर्शन से पहले एस. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।
कुलदीप सिंह राठौर ने इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आलोचना करते हुए कहा कि यह न तो देश हित में है और न ही छात्र हित में। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति बाजारीकरण को बढ़ावा देगी। राठौर ने कहा कि संविधान की धारा 21ए में वर्णित 6 से 14 साल के बच्चों को जो निशुल्क शिक्षा का अधिकार था। नई नीति में उसका पूरी तरह हनन किया गया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति एक विशेष विचारधारा को सामने रख कर बनाई गई है जो देश की धर्मनिरपेक्षता की मूल भाबना को खंडित करेगा।राठौर ने कहा कि नई शिक्षा नीति में सब्जबाग दिखाने का जो प्रयास किया गया है, वह देश को गुमराह करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए सकल घरेलू उत्पाद के 6 प्रतिशत के खर्च की बात कही गई है, जो बर्तमान समय मे किसी ऊंट के मुंह मे जीरा वाली कहावत को चरितार्थ करती है। इसमें अब कम से कम 10 प्रतिशत की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए धन कहां से आएगा, इसका भी कोई स्पष्ट उल्लेख भी नहीं है।
राठौर ने यह आरोप भी लगाया कि नई शिक्षा नीति में केन्द्रीयकृत व्यवस्था बनाने का प्रयास किया गया है, जो देश के संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है। इसमें नियामक स्वायत संस्थाओं को भी ध्वस्त किया गया है। उन्होंने कहा कि आज देशभर में जिला स्तर पर इस नई शिक्षा नीति की प्रतियां जलाकर कांग्रेस सेवादल ने अपना रोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति में विपक्षी नेताओं से कोई विचार विमर्श नहीं किया गया। इस दौरान कांग्रेस सेवादल की महासचिव गोपाल शर्मा, प्रदेश महिला संगठक ज्योति खन्ना, प्रदेश महासचिव उषा मेहता, प्रदेश सचिव सुरेंद्र वर्मा, सह सचिव रमेश ठाकुर, शक्त राम कश्यप, बलदेव पूरी, कृष्णा जरयाल, सुनीता ठाकुर, रूमा शर्मा, सत्या वर्मा, उमा, उर्मिला ठाकुर, उमा माथुर, कमलेश, कौशल्या देवी, जमना दास, पूर्ण दत, जगत राम, राम स्वरूप सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
