शिमला। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू और उनकी टीम ने हाल ही की भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रदेश के लोगों के साथ खड़े होकर युद्ध स्तर पर जो कार्य किया, उसकी विश्व बैंक के इंडिया में निदेशक तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने सराहना की है। यही नहीं, नीति आयोग ने भी इस बात की चर्चा की और प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की और इस बारे एक पत्र लिखकर इस बात का उल्लेख किया है कि हिमाचल प्रदेश में जिस प्रकार भारी आपदा हुई उससे प्रदेश के लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हुआ है और जानमाल को भी भारी नुकसान पहुंचा।
चौहान ने बुधवार को यहां मीडिया से बात करते हुए कहा कि गत दिन ही मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड द्वारा सर्टिफिकेट आफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया, जो हम सभी प्रदेशवासियों के लिए बड़े गर्व की बात है। आपदा कार्यों पर अनावश्यक टिप्पणी करने और घटिया ब्यानबाजी करने पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए चौहान ने कहा कि इस प्रकार की आलोचना करना उन्हें शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि आपदा के नाम पर किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि आपदा किसी पार्टी या वर्ग को देखकर नहीं आती। इसलिए ऐसी स्थिति को सत्तापक्ष और विपक्ष को साथ खड़े होकर काम करना चाहिए।
नरेश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आपदा के दौरान कड़े और सराहनीय फैसले लिए गए हैं तथा राहत मैनुअल में एक बड़ा बदलाव करके प्रदेश के लोगों को भारी राहत पहुंचाकर उनके घावों पर मरहम लगाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौरान हिमाचल में निजी एवं सरकारी सम्पति को भारी नुकसान पहुंचा है। 3500 से अधिक घर रहने योग्य नहीं हैं, जबकि लगभग 10 हजार घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद मुख्यमंत्री ने सभी वर्गों के लिए 4500 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, जिसका विधिवत शुभारम्भ 23 अक्टूबर को मण्डी में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सरकार घर बनाने के लिए अब 1.30 लाख की जगह 7 लाख रुपये की सहायता सरकार देगी और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उसमें बिजली एवं पानी के कनेक्शन भी सरकार उपलब्ध करवाएगी। साथ ही सरकारी दरों पर सीमेंट भी उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर तरह के मैनुअल में भी बदलाव किए हैं। हिमाचल में पौंग डैम से पानी छोड़ने पर फसलों को भी नुकसान हुआ है उसके राहत पैकेज में बढ़ौतरी की गई है।
जिला परिषद के कर्मचारियों की हड़ताल पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में नरेश चौहान ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार जिस तरह से कार्य कर रही है, उससे विपक्ष के लोग बौखला गए हैं। इसलिए यह उनकी मजबूरी है कि वह सरकार की तारीफ करने में संकोच कर रहे हैं। इससे भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा लोगों के सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि यह सुखविन्दर सिंह सुक्खू की ही सरकार है जिसने सत्ता में आते ही कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल कर दस गारंटियों में अपना पहला वायदा पूरा किया है। उन्होंने जिला परिषद कर्मचारियों से कहा कि वे धरना प्रदर्शन करने की बजाए अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देें। उन्होेंने कहा कि प्रदेश पहले ही इतनी बड़ी आपदा से जूझ रहा है और ऐसी परिस्थिति में कर्मचारियों को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनकी हर मांग को चरणबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा।
डॉ. राजीव बिन्दल के इस ब्यान पर कि हिमाचल की सरकार ज्यादा दिन तक चलने वाली नहीं है, पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नरेश चौहान ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश में अपनी सरकार को रिपीट करवाने के लिए पूरा जोर लगाया था, लेकिन प्रदेश की जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पर बेवजह आरोप लगाने वाली और नैतिकता की बात करने वाली विपक्षी भाजपा की पूर्व में प्रदेश में रही सरकार ने फिजूलखर्ची करके प्रदेश पर 75 हजार करोड़ रुपये का कर्जा छोड़ा, जिससे निपटने के लिए हमारी सरकार खर्चों पर कटौती करके प्रदेश को पटरी पर लाने के लिए पूरे प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पर इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार भाजपा के पास नहीं है।
राजस्व विभाग के लम्बित मामलों पर पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए चौहान ने कहा कि 31 अक्टूबर को प्रदेशभर में इन्तकाल अदालतों का आयोजन किया जाएगा। इसमें इन्तकाल से सम्बन्धित मामलों का मौके निपटारा किया जाएगा ताकि लोगों को बड़ी राहत प्रदान की जा सके। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था परिवर्तन का एक हिस्सा है कि सरकार ने आज प्रदेश के लोगों के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था की है और इस सम्बन्ध में लम्बित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं।
बेटियों की शादी की उम्र के बारे में पूछे गए एक सवाल में नरेश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक बात को माना है कि बेटियों की शादी की उम्र से बढ़ाई जानी आज समय की आवश्यकता है क्योंकि इस इस उम्र तक बेटियों को उच्च शिक्षा पूरी नहीं हो पाती। वह अपनी उच्च शिक्षा 24 वर्ष की आयु तक ही पूरी कर पाती है। इसलिए मुख्यमंत्री ने बेटियों की शादी की उम्र में बदलाव लाने का ऐतिहासिक फैसला लेने का विचार किया है और यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होेंने कहा कि कांग्रेस पार्टी केवल नारों पर ही विश्वास नहीं करती अपितु अपने फैसलों को जमीनी स्तर पर अमल में लाने के लिए कड़े कदम उठाने से परहेज नहीं करती।
