शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में इस बार 70 फीसदी सवाल प्राकृतिक आपदा और विभिन्न जिलों में आई बाढ़ से संबंधित हैं। इस बार सदन में कुल 743 सवाल पूछे जाएंगे। विधानसभा का यह सत्र 18 सितंबर से 25 सितंबर तक होगा और इसकी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह बात विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने शनिवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में कही।
कुलदीप पठानिया ने कहा कि इस सत्र में विधायकों द्वारा अब तक कुल 743 सवाल पूछे गए हैं जिसमें से तारांकिंत सवालों की संख्या 547 है और अतारांकित सवालों की संख्या 196 है। अधिकांश सवाल ऑनलाइन प्राप्त हुए हैं। नियम 61 के तहत एक प्रस्ताव आया है, वहीं नियम 101 के तहत 3 प्रस्ताव प्राइवेट मेंबर डे के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि नियम 102 में 1 विषय, नियम 130 में 9 विषय तथा नियम 324 के तहत एक विषय आया है। उन्होंने कहा कि जरूरी विषय कभी भी उठाए जा सकते हैं।
पठानिया ने कहा कि बजट सत्र के दौरान कुल 1215 सवाल लगे थे और उस दौरान सदन की कार्यवाही 75 घंटे तक चली थी। यह अपनेआप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि इस सत्र के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
कुलदीप पठानिया ने कहा कि प्रदेश विधानसभा में विधायक प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के तहत जरूरी विषयों को उठाते हैं, लेकिन उनके लिए अलग से “जीरो ऑवर” की व्यवस्था भी हो सकती है। इस मामले को लेकर सरकार के साथ बातचीत चल रही है। जल्दी ही इस पर निर्णय लिया जाएगा और ऐसी व्यवस्था विधायकों को दी जाएगी। विधानसभा ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण शुरू करने के लिए सरकार के साथ चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा का अपना चैनल भी जल्द शुरू होगा और बहुत सी कंपनियां इसके लिए आगे आई हैं।
कुलदीप पठानिया ने कहा कि जीरो ऑवर के लिए अलग से समय निर्धारित किया जा सकता है, लेकिन विधायकों को देखना होगा कि इसमें भाषणबाजी न करके जरूरी विषय को ही उठाएं। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही का संचालन प्रदेश के हित में किया जाता है। यहां पर जो तय किया जाता है वह मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाता है। इसका पूरा उपयोग विधायकों को भी करना चाहिए। बिना समय गंवाए विधायक प्रदेश हितों के मुद्दों को यहां पर प्रमुखता से उठाएं जिन्हें पूरा समय दिया जाता है और आगे भी दिया जाएगा।
कुलदीप पठानिया ने एक अन्य सवाल पर बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा दूसरे राज्यों में सबसे आगे है। ई- विधान प्रणाली हिमाचल ने सबसे पहले की है जिसका अनुसरण अब दूसरे राज्य भी कर रहे हैं। अभी तक गुजरात जैसे राज्य में इसकी व्यवस्था नहीं हुई जो हिमाचल से सीख रहा है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक सम्मेलन होने जा रहा है जिसमें ई-विधान प्रणाली पर चर्चा होगी।
