धर्मशाला। वैद्य सुषेण क्लब, पादप विज्ञान विभाग, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, शाहपुर परिसर की ओर से की ओर से शोद्यार्थियों और स्नातकोतर छात्र-छात्राओं के लिए शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। उन्होंने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद – हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, (CSIR&IHBT), पालमपुर और चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय चावल और गेहूं अनुसंधान केंद्र, मलां का दौरा करके जानकारियां हासिल कीं। इस भ्रमण का आयोजन प्रोफेसर प्रदीप कुमार, प्रमुख, पादप विज्ञान विभाग, अधिष्ठाता, जीव विज्ञान स्कूल और अधिष्ठाता अकादमिक के मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान पादप विज्ञान विभाग के संकाय सदस्य डॉ. सचिन उपमन्यु व डॉ. अशुन चौधरी मौजूद रहे। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य संस्थान में चल रहे शोध कार्यों के विभिन्न पहलुओं के बारे में ज्ञान प्राप्त करना एवं अनुसंधान संबंधी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए युवा मन को तैयार करना था।
डॉ. गिरीश नड्डा, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा छात्रों को हिमालयी जैव-संसाधनों और आधुनिक जीव विज्ञान के विभिन्न उन्नत अनुसंधान पहलुओं के बारे में जानकारी दी। छात्रों को टिशू कल्चर प्रयोगशाला, GIS प्रयोगशाला और जैव विविधता प्रभाग का दौरा कराया गया। सभी विभागों के वैज्ञानिकों ने छात्रों को संबोधित किया। टिश्यू कल्चर लैब में छात्रों को औषधीय पौधा Picorhiza kurrora के संवर्धन (culturing) के बारे में बताया गया। यह पौधा 10,000 फीट की ऊंचाई पर उगता है और लुप्तप्राय पौधा है। इसके उच्च औषधीय महत्व के कारण, इसे टिशू कल्चर तकनीक का उपयोग करके संवर्धित किया जाता है। संस्थान फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण औषधीय और सुगंधित पौधों के लिए डिजाइन और प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी, कृषि-प्रौद्योगिकी और पूर्ण उत्पादन पैकेज जारी करने का कार्य करता है। पालमपुर को भारत के “ट्यूलिप शहर” के रूप में बढ़ावा देने के प्रयास में विभिन्न रंगों के लगभग 40,000 ट्यूलिप बल्ब लगाए गए। इसके बाद छात्रों ने सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय चावल और गेहूं अनुसंधान केंद्र, मलां, जहां उनका मार्गदर्शन प्लांटब्रीडर डॉ. विजय राणा ने किया। छात्रों ने गेहूं की फसल की विभिन्न किस्मों, जननद्रव्य के रखरखाव और उनकी आनुवंशिक स्थिरता के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्हें फसल में स्वपरागण व परपरागण की क्रियाविधि के बारे में बताया गया। डॉ. सचिन उपमन्यु ने मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में गेहूं की फसल में लगने वाले रोग के बारे में विद्यार्थियों को बताया गया, जिनमें दो मुख्य रोग खस्ता फफूंदी और पीला रतुआ है। विद्यार्थियों को पत्तियों पर रोग के लक्षण दिखाई गये। वैज्ञानिकों ने छात्रों से बातचीत की और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
