मंडी। भारी-भरकम बस किराया वृद्धि के खिलाफ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मंडी जिला के अनेक स्थानों पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए तथा बस किराया वृद्धि वापस लेने की मांग के ज्ञापन भी सरकार को भेजे। इसी कड़ी में आज माकपा कार्यक्ताओं ने जोगिन्दर नगर में भी पार्टी के राज्य सचिवालय सदस्य व मंडी जिला सचिव कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में बस किराया वृद्धि के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा तथा उपरोक्त जन विरोधी फैसले को वापस लेने की मांग की।
इस अवसर पर माकपा नेता रविन्दर कुमार, काली दास ठाकुर, रमेश चंद, ठाकुर कांशी राम, सुदर्शन वालिया, केहर सिंह वर्मा, देस राज वालिया, रमेश ठाकुर, भीम सिंह चौधरी, सोनू, पमिल कुमार, रमेश चंद , प्रेम सिंह, राम, सुरेश ठाकुर, विनोद कुमार, चुनी लाल सीमा देवी, चंचला देवी, रानी देवी, रीना देवी, के अलावा माकपा के युवा नेता प्रवीण बिष्ट, अर्जुन बडवाल, अंकित कुमार सहित बड़ी संख्या में माकपा कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस मौके पर कुशाल भारद्वाज ने कहा कि भारी भरकम 25 प्रतिशत बस किराया वृद्धि से प्रदेश सरकार ने कोरोना महामारी के दौर में बेरोजगारी व आर्थिक तंगी की मार झेल रही जनता को राहत देने के बजाए आर्थिक बोझ डाल दिया है। पहले से ही तमाम सेवाओं को सरकार ने महंगा कर दिया है और अब इस अप्रत्याशित किराया वृद्धि से जनता पर निर्मम आर्थिक हमला किया है। माकपा को व प्रदेश की आम जनता को यह किराया वृद्धि स्वीकार्य नहीं है। अत:हर हाल में सरकार को अपना जन विरोधी फैसला वापस लेना ही चाहिए।
कुशाल भारद्वाज ने कहा कि सरकारी खजाने को भरने के नाम पर सरकार ने पहले तो आम आदमी के सस्ते राशन पर मार की थी। सरकार ने इनकम टैक्स देने वाले हर व्यक्ति की सब्सिडी को खत्म करने का फैसला ले लिया। पेट्रोल-डीजल के दाम में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे समय में जब महंगाई रिकॉर्ड तोड़ने की ओर है, भाजपा सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट में एक-एक रुपये की बढ़ोतरी कर दी। उन्होंने कहा कि राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों को न बढ़ाने का फैसला लिया था, लेकिन प्रदेश सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी को कम कर आम आदमी को जबरदस्त करंट लगा दिया था। बस किराया वृद्धि का फैसला निजी बस ऑपरेटरों की मांग के आधार पर किया गया है, जबकि एचआरटीसी की तरफ से बस किराया बढ़ाने का कोई प्रस्ताव सरकार को नहीं दिया गया था। किराया बढ़ाने बारे न ही किसी बोर्ड में कोई चर्चा हुई।
माकपा नेता ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में आम जनता सरकार से आर्थिक सहायता व वास्तविक आर्थिक पैकेज देने की उम्मीद कर रही थी, लेकिन भाजपा सरकार ने डिपुओं से मिलने वाले राशन को महंगा किया, बिजली, पानी की दरों में वृद्धि की, पेट्रोल-डीज़ल महंगा किया, प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाया, घरों से कूड़ा उठाने की दरों को महंगा किया और अब 25 प्रतिशत बस किराया बढ़ाकर जनता का कचूमर निकालने का ही काम किया है। उन्होंने मांग की कि बस किराया वृद्धि को पूरी तरह से वापस लिया जाए। साथ ही बिजली-पानी की बढ़ाई गई दरें वापस ली जाएं, पेट्रोल-डीजल की मनमानी कीमतें वसूल ना बंद किया जाए, राशन सबसिडी में कटौती को वापस लिया जाए। इसके साथ-साथ महामारी के दौर में बेरोजगारी व आर्थिक तंगी झेल रही जनता को स्पेशल राहत प्रदान की जाए। इसके लिए ऐसे सभी परिवारों को जो आयकर दाता की सीमा में नहीं आते, उनके बैंक खातों में 6 महीने तक हर महीने 7500 रूपए कैश ट्रांस्फर किया जाए। सभी जरूरतमंद परिवारों को 6 महीने तक हर महीने प्रति व्यक्ति 10 किलो ग्राम राशन मुफ्त में दिया जाए। बेरोजगारी की मार झेल रहे लोगों को रोजगार दिया जाए। मनरेगा में सालाना 200 दिन का काम व न्यूनतम 600 रू़पए दिहाड़ी दी जाए। उन्होंने कहा कि माकपा उपरोक्त मांगों पर व्यापक अभियान व संघर्ष छेड़ेगी तथा जनता को लामबंद करेगी।
