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शिमला। भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व बीजेपी सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 में संशोधन कर शिमला नगर निगम के वार्ड 34 से 41 करने के निर्णय को निरस्त करने के फैसले का स्वागत किया है। उसने सरकार से मांग की है कि चुनाव प्रक्रिया की सभी औपचारिकताओं को पूर्ण कर नगर निगम शिमला के चुनाव शीघ्र करवाएं जाए। उसकी यह मांग भी है कि पूर्व बीजेपी साकार द्वारा जो शिमला शहर में रहने वालों को वोट के अधिकार से वंचित रखने के लिए जो संशोधन किया है तथा हिमाचल प्रदेश नगर निगम चुनाव(संशोधन) नियम, 2022 बनाया है उसे भी निरस्त किया जाए तथा देश के जन प्रीतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत जो भी मतदाता योग्य हैं, उन्हें मत का अधिकार प्रदान किया जाए। इससे लोकतन्त्र मज़बूत होगा और प्रत्येक शहरवासी को अपनी स्थानीय सरकार चुनने का अधिकार प्राप्त होगा।

माकपा के जिला सचिव व शिमला नगर निगम के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि पूर्व में बीजेपी सरकार द्वारा सरकार के विरुद्ध जनाक्रोश के चलते व नगर निगम शिमला पर अपना कब्ज़ा बनाए रखने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम,1994 में मनमाने व अलोकतांत्रिक तरीके से संशोधन कर अनावश्यक ही वार्डों का परिसीमन कर इनकी संख्या 34 से बढ़ाकर 41 की गई तथा वार्ड परिसीमन के लिए तय नियमों को तोड़कर मनमाने तरीके से अपनी सुविधानुसार बनाया था। सरकार की इस अलोकतांत्रिक कार्यवाही का जनता ने विरोध किया था। उन्होंने कहा कि सीपीआईएम ने इस आलोकतांत्रिक निर्णय को सरकार व राज्य चुनाव आयोग से पुरजोर तरीके से उठाया था तथा इन संशोधनों को निरस्त करने की मांग की गई थी। इसके पश्चात उच्च न्यायालय में सरकार की परिसीमन की इस प्रक्रिया को चुनौती दी गई तथा उच्च न्यायालय ने भी पुनर्सीमांकन पर विचार करने के आदेश परित किए। परन्तु सरकार ने इस पर भी अमल नहीं किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के डर से पूर्व भाजपा सरकार ने इस अलोकतांत्रिक कार्यवाही से नगर निगम शिमला के चुनाव को टालकर जनता को उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित किया।
संजय चौहान ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि शिमला में वार्डों की संख्या में वृद्धि का कोई भी औचित्य नहीं है क्योंकि इससे जनता को कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति के चलते नगर निगम में भर्तियों पर पूर्णतः रोक लगी हुई है और आज यदि देखा जाए तो नगर निगम शिमला में 1984 में जब वार्डों की संख्या 17 थी, उस समय के अनुसार कर्मचारियो के कैडर में आज भी 1000 से अधिक पद विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े हैं, जबकि आज शहर की आबादी में तीन गुणा से अधिक वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पहले प्रत्येक वार्ड में जहां 20 से 25 कर्मचारी कार्यरत थे, अब वहां 2 से 3 कर्मचारी भी मुश्किल से कार्य कर रहे हैं और कई वार्ड तो ऐसे हैं जहां दूसरे वार्डों से कर्मचारियों को बदल कर ही काम चलाया जाता है। इससे जनता को दी जाने वाली सेवा भी प्रभावित हो रही है और कर्मचारियो पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है तथा उनका शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार मांग के बावजूद पूर्व में बीजेपी सरकार द्वारा नगर निगम शिमला में कोई भी नई भर्ती नहीं की गई, जिससे सेवाएं बूरी तरह से प्रभावित हो रही है। गत 5 वर्षों में पूर्व बीजेपी सरकार व नगर निगम शिमला द्वारा जो नीतियां लागू की गई, उससे सेवाओं व संपतियों के निजीकरण के साथ-साथ पानी, प्रॉपर्टी टैक्स, कूड़ा उठाने की फीस व अन्य सेवाओं की दरों में वृद्धि कर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के अतिरिक्त कोई भी कार्य नहीं किया।

By admin

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