शिमला। हिमाचल में सभी कार्मिकों व अधिकारियों को बायोमीट्रिक पर हाजिरी लगानी होगी। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा बायोमीट्रिक से उपस्थिति अनिवार्य करने बारे जारी सख्त आदेशों के बाद कार्मिक विभाग ने यह आदेश जारी किए।
कार्मिक विभाग के आदेशों के मुताबिक तमाम सरकारी विभागों, बोर्डों व निगमों के साथ-साथ प्रदेश सरकार के विश्वविद्यालयों व अन्य संस्थानों में कार्यरत सभी कार्मिकों व अधिकारियों को बायोमीट्रिक पर उपस्थिति दर्ज करनी होगी। कार्मिक विभाग के पत्र में हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला दिया गया है। साथ ही कहा गया है कि इन आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लिया जाएगा। जाहिर है कि आदेशों की अवहेलना पर सरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।
गौरतलब है कि प्रदेश में बायोमेट्रिक से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था पहले लागू थी। मगर कोविड काल में वर्क फ्राम होम के साथ साथ संक्रमण के फैलाव के संभावित खतरे को देखते हुए सरकार ने इसे बंद कर दिया था। मगर अब प्रदेश में कोविड की बढ़ोतरी की दर लगभग शून्य के करीब है। बावजूद इसके अफसरशाही संबंधित विभागों में बायो मेट्रिक से उपस्थिति दोबारा प्रारंभ करने में उदासीन प्रतीत हो रही है। बीते दिनों हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग से उपस्थिति का विवरण मांगा था। कोर्ट ने विभाग को प्रात: 10.05 बजे तक विवरण जमा करने के निर्देश दिए थे। मगर विभाग ऐसा करने में विफल रहा। लिहाजा मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने कहा था कि केंद्र सरकार ने अपने सभी मंत्रालयों, विभागों व सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बायोमीट्रिक से उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।मगर हिमाचल में ऐसा नहीं हो पाया। लिहाजा न्यायालय ने बायो मेट्रिक से 100 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे। अदालत के आदेशों के दो दिन बाद सरकार ने अब दोबारा से बायोमेट्रिक से उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।
कार्मिक विभाग के आदेशों के मुताबिक तमाम सरकारी विभागों, बोर्डों व निगमों के साथ-साथ प्रदेश सरकार के विश्वविद्यालयों व अन्य संस्थानों में कार्यरत सभी कार्मिकों व अधिकारियों को बायोमीट्रिक पर उपस्थिति दर्ज करनी होगी। कार्मिक विभाग के पत्र में हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला दिया गया है। साथ ही कहा गया है कि इन आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लिया जाएगा। जाहिर है कि आदेशों की अवहेलना पर सरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।
गौरतलब है कि प्रदेश में बायोमेट्रिक से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था पहले लागू थी। मगर कोविड काल में वर्क फ्राम होम के साथ साथ संक्रमण के फैलाव के संभावित खतरे को देखते हुए सरकार ने इसे बंद कर दिया था। मगर अब प्रदेश में कोविड की बढ़ोतरी की दर लगभग शून्य के करीब है। बावजूद इसके अफसरशाही संबंधित विभागों में बायो मेट्रिक से उपस्थिति दोबारा प्रारंभ करने में उदासीन प्रतीत हो रही है। बीते दिनों हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग से उपस्थिति का विवरण मांगा था। कोर्ट ने विभाग को प्रात: 10.05 बजे तक विवरण जमा करने के निर्देश दिए थे। मगर विभाग ऐसा करने में विफल रहा। लिहाजा मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने कहा था कि केंद्र सरकार ने अपने सभी मंत्रालयों, विभागों व सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बायोमीट्रिक से उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।मगर हिमाचल में ऐसा नहीं हो पाया। लिहाजा न्यायालय ने बायो मेट्रिक से 100 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे। अदालत के आदेशों के दो दिन बाद सरकार ने अब दोबारा से बायोमेट्रिक से उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।
