शिमला। ऊर्जा क्षेत्र की मिनी रत्न कंपनी सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीेएन) ने भविष्य के बिजली उत्पादन को लेकर अपने लक्ष्य में बदलाव किया है। एसजेवीएन ने वर्ष 2040 तक 50 हजार मैगावाट क्षमता के प्रोजेक्टों के निर्माण का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2030 में 25 हजार मैगावाट तथा 2023 यानि अगले साल तक 5 हजार मैगावाट की कंपनी बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। कंपनी का दावा है कि वह आसानी से अपने इस लक्ष्य को हासिल कर लेगा। इसमें हिमाचल में दो प्रोजेक्टों का निर्माण भी कर दिया जाएगा।
शुक्रवार को सतलुज जल विद्युत निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नंद लाल शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि नेपाल में अरूण नदी पर 2 और प्रोजेक्ट मिल गए हैं, वहीं अरूणाचल प्रदेश के दिवांग में 5097 मैगावाट के 5 प्रोजेक्ट कंपनी ने हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में बक्सर थर्मल प्रोजेक्ट 2023-24 में उत्पादन में आ जाएगा और इसी साल में अरूण परियोजना भी शुरू हो जाएगी।
शर्मा ने बताया कि हिमाचल में लूहरी स्टेज एक व धौलासिद्ध परियोजनाओं का निर्माण चल रहा है। यह प्रोजेक्ट 2024-25 में बनकर तैयार हो जाएंगे। 382 मैगावाट क्षमता का सुन्नी डैम प्रोजेक्ट एक महीने में दिल्ली से क्लीयर हो जाएगा। केन्द्रीय केबिनेट को इन्वेस्टमेंट अप्रूवल का मामला भेजा गया है। उन्होंने बताया कि सतलुज निगम को बने 35 वर्ष हो चले हैं, लिहाजा निगम इस उपलक्ष्य पर कोरल जुबली मना रहा है। सभी प्रोजेक्ट एरिया में कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
नंद लाल शर्मा ने बताया कि हिमाचल सरकार व केन्द्र सरकार के लिए यह उपक्रम फायदेमंद रहा है जो बड़ा कमाऊपूत है। इसके माध्यम से अभी 15 हजार लोगों को सीधा रोजगार व 15 हजार लोगों को अपरोक्ष रूप से रोजगार दिया जा रहा है।
बिजली चाहिए तो छोड़ना होगा विरोध, यदि परियोजना वाइवल होगी, तभी बढ़ेंगे आगे – शर्मा
नंद लाल शर्मा ने कहा कि लोगों को यह समझना होगा कि यदि उनको बिजली चाहिए तो उनको बलिदान भी देना होगा। विरोध छोड़कर देश हित में लोग प्रोजेक्ट निर्माण में सहयोग करें, क्योंकि घाटे की किसी भी परियोजना को बनाने के लिए निगम तैयार नहीं है। उन्होंने जांगी-थोपन-पोवारी परियोजना को लेकर पूछे सवाल पर कहा कि वहां के लोग विरोध कर रहे हैं जिनकी शंकाओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है। वहां पर निगम सुरंग निर्माण के लिए बोरिंग मशीन का इस्तेमाल करेगा, ताकि ब्लास्टिंग ना हो। जो हो सकेगा वह किया जाएगा, लेकिन यदि बात नहीं बनती है तो ऐसे प्रोजेक्ट को बनाने से भी कोई फायदा नहीं। उन्होंने कहा कि यदि डीपीआर बनाने के बाद परियोजना से कुछ लाभ होगा, तभी कंपनी आगे बढ़ेगी।
शर्मा ने काजा के प्रस्तावित सोलर पार्क को लेकर कहा कि यहां पर फॉरेस्ट लैंड डाइवर्ट करने को लेकर केन्द्र सरकार से रिलेक्सेशन मांगी गई है। क्योंकि यहां पर पेड़ नहीं है, लेकिन फॉरेस्ट लैंड है। ऐसे में यदि केन्द्र सरकार राहत देगी तो 880 मैगावाट का सोलर पार्क तीन साल पहले बन जाएगा, यदि नहीं तो तीन साल बाद ही शुरू हो पाएगा।
