शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने आरोप लगाया है कि बीजेपी नेताओं व आरएसएस से संबंधित संगठनों के अराजक तत्वों ने शिमला शहर में गुंडागर्दी का माहौल बनाया हुआ है। माकपा ने शिमला शहर में पहले सांध्य महाविद्यालय शिमला में मारपीट करने, गुंडागर्दी करने तथा माल रोड पर अराजकता फैलाने तथा इसके पश्चात बालूगंज पुलिस स्टेशन के बाहर छात्र नेता की निर्मम पिटाई व इनकी शह पर छात्र नेता व उसके वकील की बालूगंज पुलिस स्टेशन में गैर कानूनी हिरासत में पिटाई की कड़ी निंदा की है। सीपीएम ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि बालूगंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ व अन्य दोषी पुलिस कर्मियों को तुरन्त बर्खास्त किया जाए तथा इस मारपीट व गुंडागर्दी के लिए जिम्मेवार बीजेपी नेताओं व आरएसएस से संबंधित सभी दोषियों को गिरफ्तार कर इनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
सीपीएम ने इस मांग को लेकर शनिवार को शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सीपीएम के जिला सचिव संजय चौहान ने की अगुवाई में किए गए प्रदर्शन में किशोरी ढटवालिया, फालमा चौहान, जगमोहन ठाकुर, बालक राम, अशोक वर्मा, टेक चंद, संजीव खजुरिया, सुरिंदर वर्मा, दलीप कायथ, अमित, अनिल ठाकुर, बंटी, महेश वर्मा, अमित, नेहा, विनोद बिसरांटा, पूर्ण, पवन, आदि उपस्थित रहे। सीपीएम के जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि 3 सितंबर को शहर के एक कॉलेज में छात्रों के दो गुटों में झगड़े के पश्चात कॉलेज प्रशासन व पुलिस को जिस मुस्तेदी से कार्य करना चाहिए था वह उसमे पूर्णतः विफल रहे। इसके चलते 5 व 6 सिंतबर को अन्य कॉलेजों में भी इस प्रकार के छात्र गुटों में झगड़े की घटनाओ को सुनियोजित तरीके से बढ़ावा दिया गया और इसमें बीजेपी के नेताओं व आरएसएस से जुड़े संगठनों के लोगों ने भूमिका निभाई। जिस प्रकार की अराजकता व गुंडागर्दी इनके द्वारा संध्या महाविद्यालय व माल रोड पर की गई है, वह प्रदेश की राजधानी शिमला जैसे शहर व हिमाचल प्रदेश जैसे साक्षर व सभ्य राज्य में किसी से भी अपेक्षित नहीं की जा सकती है और जनता इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अराजकता, गुंडागर्दी व मारपीट पुलिस की उपस्थिति में की गई है और पुलिस द्वारा आज तक इनके विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। जिन छात्रों पर हथियारों से हमला किया उनकी एफआईआर भी पुलिस द्वारा दर्ज नहीं की गई है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगता है और इससे स्प्ष्ट होता है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में कार्य कर रही है।
संजय चौहान ने कहा कि 6 सितंबर की घटना, जिसमें अनिल ठाकुर जिसका छात्र गुटों में हुई मारपीट में कोई भूमिका नहीं थी, को पुलिस द्वारा बालूगंज थाने बुलाया गया। जब वह शाम को बालूगंज थाने पहुंचा तो बीजेपी के नेता व उसके साथ अन्य साथी भी सरकारी गाड़ी में बालूगंज थाने पहुंचे तथा वहां अनिल ठाकुर व अन्य छात्रों को पुलिस के सामने डराया व धमकाया गया तथा उसके पश्चात वह वहां से चले गए और सांध्य महाविद्यालय में मारपीट की तथा माल रोड पर गुंडागर्दी व अराजकता फैलाने लगे। इसके विडियो में स्पष्ट है कि यह सब घटना सांध्य महाविद्यालय के अध्यापकों, छात्रों, पर्यटकों व स्थानीय लोगों के समक्ष हुई और पुलिस भी वहां मौजूद थी, परन्तु इस गुंडागर्दी व अराजक घटना को रोकने के लिए पुलिस द्वारा कोई भी उचित कार्यवाही नहीं की गई और इसके पश्चात यही लोग बालूगंज गए और बालूगंज थाने के बाहर अनील ठाकुर के साथ बुरी तरह से मारपीट की। इसके बाद अनिल ठाकुर ने वकील करण कपूर को फोन किया और बालूगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने गए तो पुलिस ने दोनों को गैर कानूनी रूप से हिरासत में लिया तथा उनके साथ देर रात तक मारपीट की गई।
माकपा नेता ने कहा कि पुलिस द्वारा पुलिस स्टेशन में शिकायतकर्ता व उसके वकील को गैर कानूनी रूप से हिरासत में लेना व उनके साथ थाने में की गई मारपीट बिल्कुल गैर कानूनी व असंवैधानिक है। इसके लिये एसएचओ व अन्य दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध तुरन्त कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति, शिक्षा के निजीकरण व व्यवसायीकरण तथा हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय में गैर कानूनी भर्तियों व भ्र्ष्टाचार को लेकर छात्रों के द्वारा जो संघर्ष किये जा रहे हैं उन संघर्षों को दबाने के लिये सरकार बीजेपी व आरएसएस के संगठनों के माध्यम से छात्र समुदाय पर हमले कर रही है। सरकार अपनी विफलताओं को छुपाने तथा शिक्षा पर हमले करने वाली नीतियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दे रही है। सीपीएम सरकार की शिक्षा पर हमला करने वाली इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध छात्रों व अन्य वर्गों के द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों का समर्थन करती है तथा जनता से आग्रह करती है कि सरकार की शिक्षा प्रणाली को बर्बाद करने वाली इन जनविरोधी नीतियों व इस प्रकार की अराजकता व गुंडागर्दी करने वालों के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करें।
