शिमला। भाजपा नेता एवं एपीएमसी के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा है कि बागवानों के लिए हाई पावर कमेटी मीटिंग में सरकार ने ठोस निर्णय लिए हैं, जिससे बागबानों की बड़ा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि सरकार, बागबानों के संरक्षण के लिए काम कर रही है।
शर्मा ने शनिवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि बागवानों के लिए वर्तमान सरकार ने समय-समय पर कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में बागवानों की जरूरतों और मांगों को देखते हुए एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि
नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर चंदेल को इस हाई पावर कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इसमें बागवानों को भी स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब तक इस कमेटी को दो बैठकें हुई हैं। बहुत ही अच्छे वातावरण में हुई हैं और इनसे बागवानों के लिए काफी कुछ सार्थक निकलकर आया है।
शर्मा ने कहा कि बागवानों को सेब के दाम अच्छे मिले और रेट के अलावा उनकी जो भी समस्याएं हैं, उन्हें दूर करने के लिए यह कमेटी कार्य कर रही है। बीते रोज ही कमेटी की बागवानों और कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ एक सफल बैठक हुई, जिसमें इसमें कई फैसले लिए गए हैं, जिनमें सेब खरीदने वाली कंपनियों को सेब के रंग और भार को लेकर सरकार की ओर से 2018 में जारी नोटिफिकेशन का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियों के सीए स्टोर क्रियाशील नहीं हैं और जिन कंपनियों के प्रतिनिधि कमेटी की बैठक में नहीं पहुंचे थे, उन्हें भी नोटिस जारी किया जाएगा।
शर्मा ने कहा कि सीए स्टोर संचालक और बागवान दस दिन में कमेटी को अपने सुझाव देंगे। इसमें बागवान संगठनों के प्रतिनिधि अपनी आपत्तियां भी दर्ज करवा पाएंगे। सभी पक्षों से आए सुझावों का अध्ययन किया जाएगा। इस हाई पावर कमेटी की अगली बैठक 14 सितंबर को होगी और फिर कमेटी अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजेगी। हाईपावर कमेटी की ओर से हाल ही में लिए गए निर्णय दिखाते हैं कि प्रदेश सरकार बागवानों के हितों को लेकर संजीदा है। यह बात सत्य है कि दशकों से हर फसल के सीजन के समय कुछ न कुछ समस्याएं पैदा होती हैं। इनमें फसल की पैदावर और खपत के बीच के अर्थशास्त्र की भी कुछ भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने हर उस समय बागवानों के हितों की रक्षा की है जब-जब उन्हें किसी दिक्कत का सामना करना पड़ा है।
नरेश शर्मा ने कहा कि सेब के कार्टन पर बढ़े हुए 6 फीसदी जीएसटी का वहन भी राज्य सरकार ही कर रही है। यह बहुत बड़ा फैसला है। बागवानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग स्तर पर सरकार ने कमेटियां गठित की हुई हैं। उन्होंने कहा कि एसपीएमसी को निर्देश दिए हैं कि इस बार सेब सीजन में कम से कम एक करोड़ पेटियों की पैकेजिंग सामग्री के आवंटन की तैयारी की जाए, ताकि बागवानों को असुविधा न हो। इसके अलावा सरकार ने कीटनाशकों, फफूंदनाशकों और अन्य दवाओं पर सब्सिडी फिर से शुरू की है। अब सारी दवाएं उद्यान विभाग के केंद्रों में ही मिलेंगी। उन्होंने कहा कि इस बार बागवानों को खाद और फर्टिलाइजर की कोई कमी नहीं हुई। किसानों और बागवानों को खाद और दवाइयां समय पर मिलीं। कृषि संबंधी उपकरणों पर जो सब्सिडी काफी समय से बंद थी, उसको फिर से शुरू किया है।उन्होंने कहा की बागवानों के उत्पाद के लिए फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट संजीवनी हैं। इस दिशा में हम तेजी से कार्य कर रहे हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान 91 करोड़ रुपये की लागत से पराला में बन रही फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट में उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा।
शर्मा ने कहा कि पराला मंडी को आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जा रहा है। पराला सब्जी मंडी में कोल्ड स्टोर बन रहा है। फलों और सब्जियों के भंडारण की सुविधाओं को और बेहतर करने के लिए 60 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। इस सीए स्टोर में हजारों मीट्रिक टन एक साथ स्टोर करने की क्षमता होगी। सीए स्टोर बन जाने से किसान और बागवानों को अपनी उपज को सुरक्षित रखने में फायदा मिलेगा। फ्रूट प्रोसेसिंग की क्षमता बढ़ने से सेब की वेस्टेज बचेगी और किसानों को मार्केट में अच्छे दाम मिलेंगे। पराला मंडी सेब क्षेत्र में होने के कारण बागवानों को आसानी होगी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट घटेगी। साथ ही करीब 200 लोगों को स्थाई और अस्थाई रोजगार मिलेगा। इस प्लांट का निर्माण कार्य जनवरी 2023 में पूरा हो जाएगा। साथ ही परवाणू और जड़ोल फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट को भी अपग्रेड किया जाएगा। इस पर 17 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
