शिमला। क्या इतिहास फिर से दोहराने वाला है। यह ऐसा सवाल है जो इन दिनों कांग्रेसजनों और प्रदेश की जनता के बीच चर्चा के केंद्र में है। वर्ष 2012 में वीरभद्र सिंह केंद्रीय राजनीति से हिमाचल की राजनीति में लौटे थे और प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली थी। इसके बाद उनके आक्रामक प्रचार ने राज्य में कांग्रेस की डूबती नैया को न केवल पार लगाया, बल्कि सरकार बनाकर मुख्यमंत्री बने।
अब फिर से वही हालात बने हैं। ठीक करीब दस वर्ष बाद स्व. वीरभद्र सिंह की पत्नी व सांसद प्रतिभा सिंह को पार्टी हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपी है। उनके कंधों पर भी कांग्रेस को सत्ता में लाने की जिम्मेदारी है। प्रतिभा सिंह ने पिछले वर्ष ही भाजपा सरकार के रहते हुए मंडी संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की थी। इस सीट पर स्व. राम स्वरूप शर्मा 4 लाख से अधिक मतों से जीते थे। उनकी मौत के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ और इस सीट को कांग्रेस ने भाजपा से छीन लिया। यानी कांग्रेस ने चार लाख से अधिक की लीड को करने के बाद अपनी बढ़त बनाई और सीट कांग्रेस की झोली में डाली। प्रतिभा सिंह की मंडी संसदीय सीट से तीसरी बार सांसद चुनी गई थी। मंडी संसदीय सीट कुल मिलाकर प्रदेश के छह जिलों में पड़ती है और इसमें पूरे जनजातीय क्षेत्र के अलावा मंडी की नौ, कुल्लू की चार और शिमला जिले की एक विधानसभा सीट आती है।
अब ताजा राजनीतिक घटनाक्रम में कांग्रेस हाईकमान ने प्रतिभा सिंह को बड़ी अहम जिम्मेदारी सौंपी है। उनके कंधों पर कांग्रेस को एकजुट करने के साथ-साथ पार्टी को सत्ता में लाने या दायित्व सौंपा है। प्रतिभा सिंह इसमें कितनी सफल होती है यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन उनकी पीसीसी चीफ के पद पर तैनाती के बाद राज्यभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार जरूर हुआ है। प्रतिभा सिंह को मिली जिम्मेदारी के बाद हॉलीलॉज फिर सुर्खियों में आ गया है। हॉलीलॉज प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहा है और इस तैनाती ने फिर इस केंद्र की अहमियत को समझा है। बता दें कि हॉलीलॉज प्रतिभा सिंह का निजी आवास है और यह स्व. वीरभद्र सिंह के राजनीतिक जीवन से ही सत्ता के केंद्र के रूप में चर्चित रहा है।
