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शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का मानना है कि प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 को लेकर की गई तैयारियों में बेहद लापरवाही बरती गई है और जमीनी स्तर पर सरकार के किसी भी कार्य का असर दिखाई नहीं दे रहा है। इसका ज्वलंत उदाहरण हाल ही में सोलन में कोरोना वायरस से संक्रमित दो मरीजों को शिमला भेजा जाना है, जबकि सोलन में MMU निजी अस्पताल को कोविड-19 डेडिकेटिड अस्पताल बनाया गया है। वहीं, कोविड-19 के लिए राजधानी शिमला में बनाए गए डेडिकेटिड डीडीयू (रिपन) अस्पताल में सरकार की तैयारियों की भी पोल खोल कर रख दी है। 
माकपा विधायक राकेश सिंघा, राज्य सचिव मंडल सदस्य संजय चौहान और कुलदीप तनवर ने कहा कि जिस प्रकार से कोरोना संक्रमित मरीज की तबियत खराब होने पर रिपन अस्पताल में मूलभूत सुविधाएं जो डेडिकेटिड कोविड-19 अस्पताल में होना आवश्यक है, जिसमें वेंटिलेटर, पाइप लाइन से ऑक्सीजन, लैब, ईसीजी आदि न होने से उसे आईजीएमसी को भेजना पड़ा। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की कोविड-19 की तैयारियों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस दौरान की गई स्वास्थ्य उपकरणों की ख़रीद पर जो पहले ही आरोप लगे हैं, उनको भी इस घटना ने पुख्ता किया है। 
इन माकपा नेताओं ने कहा कि सीपीएम मांग करती है कि इस लचर व्यवस्था व लापरवाही की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए और पता लगाया जाए कि किसके आदेश पर इन कोरोना संक्रमित मरीजों को सोलन के MMU अस्पताल न भेज कर रिपन अस्पताल शिमला भेजा गया। उन्होंने कहा कि भी इस बड़ी लापरवाही के लिए दोषी है, उनके विरुद्ध तुरन्त कार्रवाई की जाए। माकपा नेता ने स्वास्थ्य विभाग में कथित घोटालों की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान जज की निगरानी में करवाने की भी मांग की। साथ ही कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक कोविड-19 के नाम पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत जो खरीद की है, उसे सार्वजनिक करे और इस पर श्वेतपत्र जारी करे।

इन माकपा नेताओं ने कहा कि सीपीएम आरम्भ से ही सरकार से मांग कर रही है कि प्रदेश में कोविड-19 से निपटने के लिए सरकार एक ठोस रणनीति बना कर कार्य करे। लेकिन सरकार इतना समय बिताने के पश्चात इसके लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठा पाई है। सरकार इससे निपटने के लिए लचर व्यवस्था व तदर्थवाद की नीति के साथ कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश में कोविड-19 की दशा में सुधार के बजाए इसके मरीजों की संख्या में नित बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। इसके साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटालों से सरकार की कार्यप्रणाली पर भी बढ़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी पुनः मांग करती है कि इन सब घोटालों व लचर व्यवस्था की निष्पक्ष जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान जज की निगरानी मे की जानी चाहिए और जो भी दोषी है उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकार तुरन्त कोविड-19 से निपटने के लिए इस लचर व्यवस्था व कार्यप्रणाली में सुधार करे तथा काबिल प्रशासक के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स का गठन कर युद्धस्तर पर रणनीति बना कर इससे निपटने के लिए नीतिगत कार्य करें। 

By admin

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