शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रसाशन द्वारा एनएसयूआई तीन छात्र नेताओं के निष्कासन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब यह मामला प्रदेश के राज्यपाल और विवि के कुलाधिपति के पास पहुंच गया है। एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष छतर सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। एनएसयूआई ने राज्यपाल से तीनों छात्र नेताओं के निष्कासन को वापिस लेने व कुलपति के बेटे की पीएचडी में कथित फ़र्ज़ी एडमिशन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष छत्तर सिंह ठाकुर ने कहा कि एनएसयूआई के छात्र साथी विश्वविद्यालय के कुलपति से अपनी मांगों को लेकर मिले कि विश्वविद्यालय की पुस्तकालय तथा हॉस्टल को खोल दिया जाए, ताकि छात्रों को अपनी परीक्षा की तैयारी कर सके, लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति ने एनएसयूआई के तीन छात्रों को विश्वविद्यालय से ही निष्कासित कर दिया है, जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
ठाकुर ने कहा कि एनएसयूआई गांधीवादी विचारधारा को मानने वाला संगठन है और विश्वविद्यालय परिसर में शांति और शिक्षा युक्त वातावरण चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति ने राजनीतिक विचारधारा की मंशा से छात्रों पर कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय में आए दिन दो छात्र संगठनों में खूनी संघर्ष होता है। सरेआम दराट, लाठी-डंडे चलाए जाते हैं। इस प्रकरण में कई छात्र घायल भी होते हैं और इससे विश्वविद्यालय में डर का वातावरण बनता है। लेकिन कुलपति ने इन हिंसावादी छात्र संगठनों पर कोई कार्रवाई नहीं की, जो अति दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। छतर ठाकुर ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह इस मामले की स्वयं जांच करेंगे और जल्द ही तीनों छात्र नेताओं का निष्कासन रद्द किया जाएगा।
