शिमला। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर ने कहा है कि शिमला जिले के जुब्बल-नावर-कोटखाई में पिछले साढ़े तीन वर्षों में सड़कों के रखरखाव व मररमत की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। इसके चलते सड़कों की हालात दयनीय बनी हुई है और इस कारण बागवानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब सीज़न गति पकड़ चुका है और सड़कों के हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि सड़कों में गड्डे हैं या गड्डों में सड़क, इसमें कोई अंतर नहीं रहा। जुब्बल-नावर-कोटखाई में सड़कों की सुध लेने की बजाए सरकार और विभाग का सारा ध्यान उप चुनाव और आए दिन आ रहे मंत्रियों के आवभगत तक सीमित है। उन्होंने कहा कि मैंहदली-टिक्कर-घनासीधार सड़क, कोहलाड़ा-पंचगांव-अन्टी सड़क, जरला-मन्दरु सड़क, कोटी- जगटेरली सड़क, खड़ापत्थर-चैंदल-शिलारू सड़क, मंढ़ोल सड़क, टूरान सड़क, बढ़ाल-मिहाना सड़क, चंद्र नगर -महासू सड़क, सावड़ा-खौणी सड़क, रैयोघाटी सड़क, मेल- मालटू सड़क , रत्नाड़ी-बाघी सड़क , गोलो-कराल सड़क, निहारी-गरावग सड़क , कलबोग आदि सड़कों की स्थिति बद से बदतर बनी हुई है, जोकि भाजपा सरकार की उदासीनता को दिखाती है।
रोहित ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षो में सड़कों के क्षेत्र को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि सड़कें पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां जीवन रेखा का कार्य करती है, वहीं भाजपा सरकार ने पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से चले हुए कार्य को रोका और कुछ कार्य की गति धीमी कर दी, जबकि एक भी सड़क के प्रोजेक्ट को स्वीकृति नहीं दी। ठाकुर ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सड़कों के क्षेत्र में रिकॉर्ड 250 करोड़ रुपए के 61 प्रोजेक्ट जुब्बल-नावर-कोटखाई के लिए स्वीकृत हुए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही ठियोग-हाटकोटी सड़क योजना में युद्धस्तर पर चले हुए पुलों का निर्माण कार्य रोक दिया, जिसमें से अधिकतर पुलों का 50 फीसदी तक निर्माण हो चुका था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के साढ़े साल के कार्यकाल के बाद भी पुलों के निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है।
