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मंडी। हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर द्धारा बंजार में एक जन समूह को सम्बोधित करते हुए अध्यापकों के ख़िलाफ़ दिये गये बयान की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की मंडी जिला कमेटी ने कड़े शब्दों में निंदा की है।  
माकपा के राज्य सचिवालय सदस्य व मंडी जिला सचिव कुशाल भारद्वाज ने कहा कि जलशक्ति मंत्री का यह बयान देना कि कोरोना काल में अध्यापकों ने सिर्फ मौज की है तथा ये किस चीज के कोरोना वारियर हैं जो बोलते हैं कि सबसे पहले उनको वैक्सीन लगाओ, न केवल समस्त अध्यापकों का अपमान है, बल्कि इससे उनको भारी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि जलशक्ति मंत्री के इस बयान से आम जनमानस को भी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि मंत्री का यह कहना कि अध्यापकों ने कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा मज़े लिये और कोई काम नहीं किया है और अब फ्रंट लाईन वर्कर बन कर वैक्सीन लगवाने में भी सबसे आगे हैं निंदनीय है।
कुशाल भारद्वाज ने कहा कि जलशक्ति मंत्री को पता होना चाहिए कि शिक्षण संस्थानों को बंद करने का निर्णय हर बार केबिनेट की बैठक में ही लिया गया। शिक्षण संस्थानों को बंद करने का फैसला इसलिए लेना पड़ता है, क्योंकि शिक्षण संस्थानों से संक्रमण के फैलने का खतरा सर्वाधिक रहता है। अध्यापकों ने कोरोना काल में भी बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने, उनकी अटेंडेंस लगाने और संस्थान से संबंधित अन्य जरुरी कार्यों को जारी रखा है, लेकिन मंत्री का बयान समस्त अध्यापक जगत को अपमानित करता है। इसे देखते हुए मंत्री को इस बयान के लिए सार्वजनिक माफ़ी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री अपने मंत्री पर लगाम नहीं लगा सकते हैँ तो उनको स्वयं इस बयान की सार्वजनिक आलोचना करते हुए सरकार की तरफ से माफ़ी मांगनी चाहिए। 
कुशाल भारद्वाज ने कहा कि अपनी नाकामियों का ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ना ठीक नहीं है।  सार्वजनिक मंचों से कर्मचारियों व अफसरों को बेइज्जत करने से अपने मंत्रालय व सरकार की असफलता पर पर्दा डालने से कुछ नहीं होगा। लेकिन हर कर्मचारी के आत्मसम्मान की रक्षा होनी चाहिए। 

By admin

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