शिमला। पंजाब के छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ प्रदेश में भी सरकारी डॉक्टरों ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने डॉक्टरों के एनपीए में कटौती को सही नहीं ठहराया है। इसके खिलाफ हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन सोमवार से दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक करने का निर्णय लिया है। दीन दयाल उपाध्याय (रिपन) अस्पताल के चिकित्सकों ने काले बिले लगाकर पेन डाउन स्ट्राइक कर विरोध किया। क्षेत्रीय जिला अस्पताल में चिकित्सक सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक वह पेन डाउन स्ट्राइक पर रहे। इस दौरान ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रही और चिकित्सक ओपीडी में नही बैठे। इस समय अवधि में कई ओपीडी के दरवाजे बंद रहे, जबकि चाइल्ड, मेडिसिन, ऑर्थो, सर्जरी ओपीडी में चिकित्सक नहीं बैठे और बाहर मरीजों की भीड़ लगी रही।
उधर, हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के महासचिव डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने बताया कि पंजाब मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के समर्थन में दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक करने की निर्णय लिया गया है। पंजाब के छठे वेतन कमीशन के अनुसार छठे वेतन कमीशन ने सिफारिश की है कि एनपीए को 25 प्रतिशत से कम कर के 20 प्रतिशत कर दिया जाए और शुरुआती वेतन के अलावा कोई भी भत्ता वेतन का हिस्सा न बनाया जाए, जोकि तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 2 सालों से डॉक्टर कोरोना महामारी में फ्रंटलाइन के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में वेतन बढ़ाने के बजाय कम करना उचित नहीं है। महामारी में एनपीए को बढ़ाना चाहिए था न कि कम होना चाहिए। पंजाब में डॉक्टर लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं। डॉ. पुष्पेंद्र ने कहा कि हिमाचल मेडिकल डॉक्टर एसोसिएशन स्वास्थ्य सचिव के माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को इसके खिलाफ ज्ञापन देगा। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ आंदोलन लगातार जारी रहेगा। आगामी समय में रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन व अन्य संगठन भी पेन डाउन स्ट्राइक में हिस्सा लेंगे। अगर पंजाब पे कमीशन इसमें सुधार नहीं करेगा, तो आंदोलन को गति दी जाएगी।
