शिमला। प्रदेश सरकार द्वारा बिजली कर्मचारियों की कोरोना वैक्सीन में प्राथमिकता व फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स की श्रेणी में न रखने से बिजली कर्मचारी खफा हैं। हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के आह्वान पर वीरवार को प्रदेशभर में बिजली कर्मियों ने काले बिल्ले पहनकर इसे लेकर अपना खिलाफ विरोध जताया।
यूनियन ने पिछले दिनो मे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की थी कि जरूरी सेवा में तैनात बिजली बोर्ड के 18-45 वर्ष के बिजली कर्मचारियों को भी प्राथमिकता के आधार पर कोरोना वेक्सीन लगाई जाए। साथ ही बिजली कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वारियर्स की श्रेणी में डाला जाए। लेकिन प्रदेश सरकार ने कोरोना वारियर्स तो दूर, जरूरी सेवाओं में तैनात बिजली कर्मियों को कोरोना वैक्सीन की प्राथमिकता में भी नहीं रखा है, जिससे जरूरी सेवा में लगे बिजली कर्मचारियों का मनोबल घटा है।
यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा ने कहा कि बिजली कर्मचारी व अभियंता राज्य में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए इस महामारी के बीच अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड में अभी तक 4 कर्मचारी कोरोना से शाहिद हुए चुके हैं, जिसमें बड़सर से 23 वर्ष के अभिषेक जूनियर टीमेट भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सारे बिजली कर्मचारी संक्रमित हो गए हैं, जिसमें कुछ की स्थिति बहुत गंभीर है। वहीं, बिजली बोर्ड में अधिकतर लाइन व कमर्शियल तथा आउटसोर्स स्टाफ जो फील्ड में कार्यरत है, 18 से 45 वर्ष के बीच का है, जिसको अभी तक कोरोना वैक्सीन न लगने से जोखिम उठाना पड़ रहा है।
खरवाड़ा ने कहा कि इस महामारी के बीच में बिजली आपूर्ति 24 घंटे बनाए रखना बहुत बड़ा कार्य है और ऐसी हालात में इसमें कार्यरत बिजली कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि बिजली कर्मचारियों की आपातकालीन सेवाओं को देखते हुए केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों को बिजली कर्मचारियों को प्राथमिकता पर वैक्सीन लगाने के आदेश भी जारी किए हैं, वहीं बहुत से राज्य सरकारों द्वारा बिजली कर्मियों को कोरोना वररियर्स की श्रेणी में अधिसूचित किया है।कुलदीप खरवाड़ा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस महामारी के बीच केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार 18-45 उम्र के बिजली कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर कोरोना वैक्सीन लगवाई जाए, जिससे वह स्वस्थ रहकर प्रदेश की जनता को विद्युत आपूर्ति सुचारू रख सकें। वहीं, दूसरे राज्यों की तर्ज़ पर इन्हें फ्रंटलाइन वॉरियर्स की श्रेणी में लाया जाए, जिससे किसी तरह के हादसे पर उनके परिवार को उचित सहायता मिल सके।
