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शिमला। छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश ने निजी स्कूलों द्वारा वर्ष 2021 की ट्यूशन फीस में फीस में 15 से 65 प्रतिशत बढ़ोतरी व कम्प्यूटर फीस में 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के खिलाफ मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। मंच के सदस्यों ने शिक्षा निदेशालय के बाहर नारेबाजी कर निजी स्कूलों द्वारा फीसों में की गई भारी बढ़ोतरी का विरोध किया। प्रदर्शन के बाद मंच का प्रतिनिधिमंडल अतिरिक्त निदेशक उच्चतर शिक्षा से मिला व उन्हें मांग पत्र सौंपा। मंच के मुताबिक अतिरिक्त निदेशक ने आश्वासन दिया कि दो दिन के भीतर वर्ष 2021 में निजी स्कूलों द्वारा की गई 15 से 65 फीसदी की फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए जाएंगे। प्रदर्शन में विजेंद्र मेहरा, अरुण ठाकुर, किशन सिंह, रमेश चंद, राजेश वशिष्ठ, दिनेश, धर्म चंद, चन्द्रमणि, पवन, राजू, बालक राम, दलीप सिंह, सुरेंद्र बिट्टू, पूर्ण चंद, राम प्रकाश, हनी, हिमी देवी, संगीता, सीमा आदि मौजूद रहे।
मंच के प्रदेश संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि प्रदेश सरकार की नाकामी व उसके निजी स्कूलों से मिलीभगत के कारण निजी स्कूल दोबारा से मनमानी पर उतर आए हैं। ये स्कूल वर्ष 2021 में दोबारा से सीधी लूट पर उतारू हैं। इन स्कूलों ने इस वर्ष ट्यूशन फीस में अभिभावकों के साथ बिना किसी बैठक के टयूशन फीस में 15 से 65 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। निजी स्कूलों ने कम्प्यूटर फीस में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि करके उसे दोगुना कर दिया है। इस तरह ये स्कूल कोरोना काल में भी पूर्ण मनमानी कर रहे हैं और आईवी स्कूल में पांचवीं कक्षा की छात्रा इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल अध्यापकों व कर्मचारियों के कोरोना काल के वेतन का भुगतान भी नहीं कर रहे हैं। आईवी स्कूल के अध्यापकों व कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग के 27 मई 2020 के अनुसार जब कोरोना काल का वेतन मांगा तो लगभग एक दर्जन अध्यापकों व कर्मचारियों को गैर कानूनी तरीके से नौकरी से निकाल दिया गया।
मेहरा ने कहा कि अतिरिक्त निदेशक ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि बिना जनरल हाउस की मंजूरी के फीस बढ़ोतरी को अमान्य किया जाएगा। साथ ही निजी स्कूलों को अभिभावकों की आम सभा करके पीटीए के गठन के आदेश दिए जाएंगे। उन्होंने अध्यापकों व कर्मचारियों के कोरोना काल के वेतन का भुगतान करने का भी आश्वासन दिया।
विजेंद्र मेहरा ने कहा कि निजी स्कूल सीबीएसई व हि.प्र. स्कूल शिक्षा बोर्ड के दिशानिर्देशनुसार एनसीईआरटी व एससीईआरटी की सस्ती व गुणवत्तापूर्वक किताबों को लगाने के बजाए प्राइवेट पब्लिशर्ज़ की चार गुणा महंगी किताबों को बेचकर निजी स्कूल प्रबंधनों द्वारा अभिभाकों पर भारी आर्थिक बोझ लाद कर भारी मुनाफाखोरी की जा रही है और इस पर तुरन्त रोक लगनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से एक बार पुनः मांग की कि वह निजी स्कूलों में फीस, पाठ्यक्रम व प्रवेश प्रक्रिया को संचालित करने के लिए तुरन्त कानून बनाए व रेगुलेटरी कमीशन का गठन किया जाए।

By admin

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