राजस्व की लालसा में युवाओं का भविष्य दांव पर न लगाए सुक्खू सरकार : जम्वाल
मंडी। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जम्वाल ने हिमाचल प्रदेश में फिर से सरकारी लॉटरी शुरू करने की तैयारी पर सुक्खू सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का यह फैसला उसकी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर हिमाचल का युवा नशे जैसी जानलेवा बुराई से जूझ रहा है और दूसरी ओर सरकार राजस्व बढ़ाने के नाम पर युवाओं के सामने लॉटरी ता सपना दिखा रही है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि युवाओं को रोजगार चाहिए, लॉटरी का टिकट नहीं। प्रदेश का युवा अपनी मेहनत और हुनर के दम पर आगे बढ़ना चाहता है। सरकार को उसके हाथ में रोजगार, कौशल और अवसर देने चाहिए, न कि जल्दी पैसा कमाने का शॉर्टकट दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और आर्थिक दबाव के बीच लॉटरी जैसी व्यवस्था युवाओं के एक वर्ग को आसानी से पैसा कमाने के भ्रम में फंसा सकती है। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रदेश में लॉटरी शुरू करने की इतनी जल्दी क्यों है? क्या सरकार की प्राथमिकता रोजगार के नए अवसर पैदा करना है या फिर सरकारी खजाने में पैसा बढ़ाने के लिए ऐसे रास्ते तलाशना है, जिनका सामाजिक प्रभाव गंभीर हो सकता है।
भाजपा मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि सरकार टेंडर में 10 करोड़ रुपये सालाना लाइसेंस फीस, न्यूनतम 6 करोड़ रुपये की गारंटीड राशि, कम से कम 2 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी और 30 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी जैसी व्यवस्थाओं के जरिए अपने राजस्व की सुरक्षा तो सुनिश्चित कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकार ने क्या इंतजाम किए हैं? उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि लॉटरी से हर साल कितनी आय होगी, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि समाज पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लॉटरी को अगर जल्दी पैसा कमाने का आसान माध्यम समझ लिया गया तो इसकी शुरुआत छोटी रकम से होकर धीरे-धीरे आदत में बदल सकती है। खासकर युवा वर्ग इसके आकर्षण में सबसे पहले आ सकता है।
राकेश जम्वाल ने कहा कि नशे की लत हो या जल्दी पैसा कमाने की लत, दोनों ही परिवारों और समाज को भीतर से कमजोर करती हैं। जिस प्रदेश में सरकार स्वयं नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा कर रही है, उसी प्रदेश में युवाओं के सामने ऐसी गतिविधि को बढ़ावा देना विरोधाभासी है। सरकार को युवाओं को हर उस बुराई से बचाना चाहिए जो उनके भविष्य को अंधकारमय कर सकती है। उन्होंने कहा कि आज हिमाचल के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, रोजगार की तलाश में हैं, स्वरोजगार के अवसर खोज रहे हैं और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में सरकार को उनके लिए उद्योग, पर्यटन, स्टार्टअप, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए। युवा के हाथ में नौकरी का नियुक्ति पत्र होना चाहिए, लॉटरी का टिकट नहीं।
राकेश जम्वाल ने कहा कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक और मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार करना चाहिए। प्रदेश में निवेश लाना, उद्योगों को बढ़ावा देना, पर्यटन को मजबूत करना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना ज्यादा बेहतर और टिकाऊ रास्ता है। केवल कुछ करोड़ रुपये के राजस्व के लिए ऐसी व्यवस्था खड़ी करना, जिसके सामाजिक दुष्प्रभाव आने वाले वर्षों में सामने आ सकते हैं, दूरदर्शी नीति नहीं कही जा सकती। उन्होंने कहा कि राजस्व की लालसा में युवाओं का भविष्य दांव पर न लगाए सुक्खू सरकार। सरकार को यह समझना होगा कि सरकारी खजाने में आने वाला पैसा महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यदि युवा गलत आदतों और आर्थिक नुकसान के जाल में फंस गया तो इसका खामियाजा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा परिवार भुगतेगा।
इस फैसले पर फिर से विचार करे सरकार
भाजपा नेता ने कहा कि सुक्खू सरकार को इस फैसले पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए और पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि लॉटरी के सामाजिक प्रभाव से युवाओं को बचाने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल के युवाओं को सपने बेचने वाली लॉटरी नहीं, उन सपनों को पूरा करने के लिए अवसर चाहिए। जम्वाल ने कहा कि सरकार को अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करनी होंगी। युवाओं को रोजगार, शिक्षा और अवसर चाहिए; उन्हें ऐसी किसी व्यवस्था की जरूरत नहीं जो उन्हें रातों-रात अमीर बनने के सपने दिखाए। सुक्खू सरकार को राजस्व से पहले हिमाचल के युवा और उनके भविष्य की चिंता करनी चाहिए।
