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योजना से एससी समुदाय को लाभ हुआ या नहीं, अधिकारी नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब 

अनुसूचित जाति आयोग ने शिमला में की अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम सहित अन्य योजनाओं की समीक्षा 

शिमला‌‌। हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग की जिला शिमला की समीक्षा बैठक बुधवार को बचत भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने की।

कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि कई विभागों ने रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखा है। अधिकारी अगर फील्ड में काम करते हैं तो फिर रिकॉर्ड स्वयं ही बेहतर तैयार होता है लेकिन रिकॉर्ड में लापरवाही से अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर वर्ग के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से विकास कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के माध्यम से ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के सपनों को पूरा कर ही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच के कारण इस तरह की योजनाओं का लाभ निराश्रित बच्चों को मिल रहा है।  

कुलदीप कुमार ने कहा कि सरकार की योजनाओं को पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना हर अधिकारी और कर्मचारी का कर्तव्य है। कोई भी योग्य व्यक्ति योजना से महरूम नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में आत्मनिर्भर हिमाचल के संकल्प के साथ प्रदेश आगे बढ़ रहा है।

आयोग सदस्य दिग्विजय मल्होत्रा ने कहा कि अनुसूचित जाति/जनजाति एक्ट के तहत मामलों की जांच निष्पक्ष तौर पर होनी चाहिए। पुलिस  मामलों की कैंसिलेशन रिपोर्ट बनाकर जांच सही नहीं कर रही है। अगर एट्रोसिटी के मामले में आरोप जांच में तय नहीं हो पाते हैं तो अन्य धाराओं के तहत आरोपों की जांच की जाए।

आयोग के सदस्य डॉ. विजय डोगरा ने कहा कि अनुसूचित जाति/जनजाति विजिलेंस कमेटी की बैठक एसडीएम स्तर पर नियमित तौर पर करें ताकि पीड़ित लोगों को न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि आयोग ने आज जो समीक्षा की है उसकी रिपोर्ट हर विभाग को 7 दिनों के मध्य देना सुनिश्चित करें।

बैठक में अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत जारी बजट की समीक्षा की गई। जिला‌ शिमला में वर्ष 2025-26 में 25 करोड़ 43 लाख रुपए जारी हुए है और 31 मार्च 2026 तक 23 करोड़ 49 लाख रुपए व्यय किये गए। यानी 92 फीसदी बजट खर्च किया जा चुका है। इसके साथ ही आयोग ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि अपने-अपने डिवीज़न में ऐसी योजनाओं का जिक्र करें जो सबसे बड़ी हो और जिसके तहत अधिक से अधिक अनुसूचित जाति के लोगों को लाभ मिला हो। इसके बारे में भी आयोग ने रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। 

समीक्षा बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारी नहीं बता पाए कि अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत बनी योजनाओं से आम जन को लाभ हुआ या नहीं। इस पर आयोग ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि बैठक से पहले भी उपायुक्त कार्यालय की ओर से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन इसके बाद भी लोक निर्माण विभाग के अधिकारी बैठक में रिकॉर्ड लेकर ही नहीं आए। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तरह की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। 

आयोग ने पूछा की जिला में अम्बेडकर भवन कहां-कहां बने हैं। इसका रखरखाव कौन कर रहा है। इसके बारे में हर एसडीएम को अपने-अपने उपमण्डल के तहत आने वाले अम्बेडकर भवन की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए। 

बैठक में बताया गया कि जिला में 265 सदस्य पंचायती राज एवं शहरी निकाय की संस्थाओं में अनुसूचित जाति से संबंधित है। अनुसूचित जाति/ जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989 के तहत वर्ष 2023 में 24 मामले, 2024 में 37 और 2025 में 42 मामले पंजीकृत हुए हैं। इसमें वर्ष 2024 में 3 और 2025 के 15 मामलों में जांच चल रही है। कैंसलेशन रिपोर्ट के तहत वर्ष 2023 में 9, 2024 में 14 और 2025 में 3 मामले तैयार किए गए है। पिछले तीन सालों में केवल 2 मामलों में बरी हुए हैं। वर्ष 2018 से लेकर 2026 तक कुल 52 मामले जिला न्यायालय में लंबित है।

जिला में अंतर्जातीय विवाह पुरस्कार योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 29, 2025-25 में 28 और 2025-26 में 11 लाभार्थी रहे। इसी प्रकार, स्वर्ण जयंती आश्रय योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में 285 घर स्वीकृत हुए हैं। 

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने आयोग का स्वागत किया और बताया कि जिला में अनुसूचित जाति के हितों के लिए आवंटित बजट के क्रियान्वयन की निगरानी समय-समय पर की जाती है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत जिला शिमला से इस वर्ष भारत भ्रमण के किए 61 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को भेजा गया था।

अधिकारी बैठक से नदारद, आयोग ने दिए सख्त आदेश 

समीक्षा बैठक में कई विभागों के विभागाध्यक्ष मौजूद नहीं थे। इस पर आयोग ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि जब बैठक में विभागाध्यक्ष बुलाये गए थे तो ऐसे में अधीनस्थ अधिकारियों को भेज कर बैठक को हल्के में लेना आयोग को स्वीकार नहीं है। बैठक में लोक निर्माण विभाग ने एसडीओ और सहायक अभियंता भेज दिए। इस पर आयोग ने तुरंत अधिशाषी अभियंता को बुलाने के निर्देश दिए तो करीब 15 मिनट में एक्सईएन बैठक में पहुंच गए। आयोग ने निर्देश दिए कि जिलाधीश शिमला बैठक में नदारद रहे अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगेगे और आयोग को अवगत करवाएंगे ।    

जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा ने बैठक में क्रमवार मदों को प्रस्तुत किया। अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा ने आयोग का धन्यवाद किया और आयोग को आश्वस्त किया की आयोग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। 

बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (हेडक्वार्टर) गौरवजीत, एएसपी (सिटी) मेहर पंवर, नगर निगम आयुक्त सचिन कँवल, एडिशनल एसपी अमित ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल सहित अधिकारी, एसडीएम जुब्बल गुरमीत नेगी, एडीएम रामपुर हर्ष अमरेंद्र नेगी, एसडीएम रोहड़ू धर्मेश धर्मोत्रा, एसडीएम सुन्नी राजेश वर्मा, एसडीएम कुमारसैन मुकेश कुमार, एसडीएम डोडरा कवार कीर्ति चंदेल, डीएसपी सिद्धार्थ शर्मा, डीएसपी रामपुर नरेश शर्मा, डीएसपी रोहड़ू प्रणव चौहान, डीएसपी ठियोग सुशांत शर्मा, डीएसपी शक्ति सिंह, गैर सरकारी सदस्य बुद्धि राम जस्टा, सदस्य सोनम नेगी और गणमान्य मौजूद रहे।

By admin

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