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मत्स्य पालकों को फिश रॉयल्टी में राहत, विभाग को  बेहतर मार्केटिंग और प्रोसेसिंग सुविधाओं का विकल्प तलाशने के दिए निर्देश 

बिलासपुर। नगर नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि मत्स्य पालकों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए मछली खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से बैठक कर इस दिशा में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। वे शनिवार को कृषि उपज मंडी समिति, बिलासपुर के सौजन्य से कुटबौगंड झंडूता में आयोजित एक दिवसीय जिला स्तरीय मत्स्य जागरूकता शिविर को संबोधित कर रहे थे।

राजेश धर्माणी ने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों को हरसंभव सहायता देने के लिए वचनबद्ध है। इसी कड़ी में फिश रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया गया है, जिससे मछुआरों को सीधा आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक गेहूं की खरीद पर 6000 रुपये प्रति क्विंटल, मक्की पर 4000 रुपये प्रति क्विंटल, हल्दी पर 9000 रुपये प्रति क्विंटल और जनजातीय क्षेत्रों में जौ पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित कर किसानों को राहत दी गई है।

तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि फोरलेन पर ओहर के समीप मत्स्य सहकारी सभाओं को कच्ची व पकी हुई मछली बेचने के लिए स्थाई दुकानें उपलब्ध करवाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त फोरलेन के किनारे जहां भी उपयुक्त स्थान उपलब्ध होगा, वहां मत्स्य सभाओं को अस्थाई स्टॉल लगाने की अनुमति दी जाएगी ताकि स्थानीय मछुआरे चंडीगढ़-मनाली मार्ग से गुजरने वाले पर्यटकों को सीधा लाभ पहुंचा सकें।

धर्माणी ने बताया कि नैना देवी मंदिर को बाबा बालक नाथ मंदिर से जोड़ने के लिए केबल फेरी परियोजना प्रस्तावित है, जिससे श्रद्धालुओं की गाड़ियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना संभव हो सकेगा। इस योजना के लिए प्रदेश सरकार ने डीपीआर तैयार करने के लिए 14 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं।

राजेश धर्माणी ने कहा कि क्षेत्र में सोलर पावर प्रोजेक्ट की अपार संभावनाएं हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी भूमि उपलब्ध कराता है, तो सरकार परियोजना स्थापना के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मछलियों की अधिक पैदावार होने पर ठेकेदारों द्वारा कम खरीद की शिकायतों का समाधान किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि अतिरिक्त मछली को कोल्ड स्टोरेज में संरक्षित कर प्रोसेसिंग के माध्यम से निष्पादित किया जा सके। इससे स्थानीय मछुआरों की आमदनी में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी।

इस अवसर पर, पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता विवेक कुमार ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि फिश रॉयल्टी में कटौती कर सरकार ने मछुआरों को सीधी राहत दी है। उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार मछुआरों के बीच जाकर उनकी व्यावहारिक समस्याओं को जानने का प्रयास कर रही है।

कोऑपरेटिव सोसाइटी जगतखाना के प्रधान विजयपाल नाग ने मत्स्य आवास योजना को पुनः शुरू करने की मांग की, ताकि मछुआरों को आवास लाभ मिल सके। साथ ही, जल व अन्य उपकरणों की खरीद हेतु दो लाख रुपये की सहायता राशि सुनिश्चित करने का अनुरोध भी किया। उन्होंने आग्रह किया कि एपीएमसी एक प्रतिशत रॉयल्टी तो वसूल रही है, लेकिन अब तक मत्स्य सभाओं को बुनियादी ढांचा सुविधा नहीं मिल पाई है। उन्होंने समिति कार्यालय निर्माण सहित अन्य सहायता की भी मांग की।

इस अवसर पर एपीएमसी चेयरमैन सतपाल वर्धन, हिमुडा बोर्ड के निदेशक सदस्य जितेंद्र चंदेल, एपीएमसी सदस्य मनिंदर सिंह चंदेल, सीमा चंदेल, कांग्रेस प्रवक्ता प्रेम कौशल, जिला फेडरेशन अध्यक्ष रंजीत कश्यप सहित अनेक मत्स्य सहकारी सभाओं के पदाधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।

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