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मंडी। उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि मंडी जिला में घर-घर जाकर कोरोना लक्षणों की जांच के लिए चलाए गए एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान में 10 लाख 10 हजार 451 लोगों की जांच की गई है। राहत की बात यह है कि इस दौरान जिला में कोई भी व्यक्ति सांस की गंभीर समस्या से ग्रसित नहीं पाया गया।
अब दूसरे चरण में जिला में हर ब्लॉक में जाकर लोगों के रैंडम सै।पल लिए जा रहे हैं, ताकि कोरोना संक्रमण का कोई भी मामला किसी तरह भी छुपा न रहे। स्वास्थ्य विभाग की टीमें हर ब्लॉक में 10-10 रैंडम सैंपल लेंगी। इस तरह जिला में अगले 4-5 दिन में करीब 100 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे। उनके परिणामों के आधार पर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

फेस कवर या घरेलू मास्क पहन कर ही बाहर निकलें
उपायुक्त ने कहा कि हिमाचल में आए कोरोना के अधिकतर पॉजिटिव मामलों में संक्रमित व्यक्तियों में रोग को लेकर कोई प्रत्यक्ष लक्षण नहीं थे। इसे लेकर सभी को सावधान व सचेत होने की जरूरत है। कोई व्यक्ति कोरोना के लक्षणों के बिना भी कोरोना संक्रमण का संवाहक हो सकता है। इसलिए सरकार का सोशल डिस्टेंसिंग का जो आग्रह है उसका पूरी तरह पालन करें। फेस कवर अथवा घर पर बना मास्क पहन कर ही घर से निकलें।  

अब क्वरंटाइन कैंप बंद

ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार जिला की सभी सीमाएं सील हैं। अंतर्जिला आवागमन पूरी तरह बंद है। उन्होंने कहा कि जिला में सलापड़ व बलद्वाड़ा में बनाए गए क्वारंटाइन कैंप अब बंद कर दिए गए हैं। इनमें रखे मार्च के अंत में बिना वैध अनुमति के जिला की सीमा में प्रवेश किए लोगों को 14 दिन की अवधि पूरी करने के बाद उनके घरों को भेज दिया गया है। अब यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी तरीके से जिला की सीमा में प्रवेश करता है तो उसे क्वारंटाइन कैंप में रखने की बजाय वापिस लौटा दिया जाएगा। उपायुक्त ने लोगों से घरों ने अनावश्यक बाहर ने निकलने अपील की है।

By admin

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