शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने शिमला के शांति विहार, भट्टाकुफर और आस-पास के क्षेत्रों में फोरलेन निर्माण के तहत चलौंटी से भट्टाकुफर के बीच बन रही ट्विन टनल के कारण भवनों में कथित तौर पर आई दरारों पर गंभीर चिंता जताई है। माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र में निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए तथा पूरे क्षेत्र का ‘सुरक्षा भेद्यता मूल्यांकन’ करवाया जाए। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे फोरलेन निर्माण को लेकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
संजय चौहान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से टनल निर्माण वाले क्षेत्र में कई भवनों में दरारें दिखाई दे रही हैं और इनमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उनके अनुसार करीब 10 से 12 मकानों में बड़े पैमाने पर दरारें सामने आई हैं। माकपा ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में वैज्ञानिक एवं सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे क्षेत्र के भवन प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि शांति विहार और भट्टाकुफर घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित ट्विन टनल के ऊपर और आसपास 300 से अधिक भवन प्रभावित हो सकते हैं, जिससे भवन मालिकों, किरायेदारों और छोटे कारोबारियों सहित करीब 3500 से 4000 लोग प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य इसी तरह आगे बढ़ा तो अन्य भवन भी इसकी जद में आ सकते हैं और स्थानीय लोगों के सामने आवास का संकट पैदा हो सकता है।
पहले प्रस्तावित था भट्टाकुफर से ढली तक सीधा मार्ग
चौहान ने कहा कि फोरलेन निर्माण के लिए पहले भट्टाकुफर से ढली तक सीधा मार्ग प्रस्तावित किया गया था। इसके लिए भूमि अधिग्रहण किया गया और कई रिहायशी भवनों के मालिकों को मुआवजा भी दिया गया था। बाद में एनएचएआई ने सर्वे में बदलाव करते हुए घनी आबादी वाले भट्टाकुफर और शांति विहार के नीचे से सुरंग निर्माण का विकल्प अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वे में बदलाव को लेकर स्थानीय लोगों के साथ पर्याप्त चर्चा और जनसुनवाई नहीं की गई। उन्होंने इस पूरे मामले में निर्माण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों और प्रभावित लोगों के अधिकारों की समीक्षा करने की मांग की।
प्रभावित लोगों को राहत व मुआवजा देने की मांग
संजय चौहान ने मांग की कि जिन लोगों के भवनों को दरारों अथवा निर्माण कार्य से नुकसान हुआ है, उन्हें उचित राहत और मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी फोरलेन निर्माण के दौरान भट्टाकुफर से सटे संजय वन कॉलोनी और ढली क्षेत्र में भवनों को नुकसान पहुंचने तथा दरारें आने की घटनाएं सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि कुछ भवनों को प्रशासन की ओर से असुरक्षित घोषित किया गया है और प्रभावित लोगों को अभी तक उचित राहत एवं पुनर्वास नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में कृषि भूमि को हुए नुकसान की भरपाई का मामला भी लंबित है। उन्होंने सरकार और एनएचएआई से पुराने मामलों का भी समाधान करने की मांग भी की।
