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पूछा – भाजपा इस समझौते के पक्ष में है या इसके खिलाफ

परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपये की होगी आय – जिंटा 

शिमला। प्रदेश कांग्रेस संगठन महामंत्री विनोद ज़िंटा ने किशाऊ जल विद्युत परियोजना को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल पर प्रदेश की जनता, विशेषकर सिरमौर जिला के किसानों एवं प्रभावित परिवारों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि किशाऊ जल विद्युत परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर है, जिससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आय होगी।

जिंटा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने परियोजना से जुड़े समझौते में हिमाचल प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के जल संसाधनों का अधिकतम आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। सिरमौर के किसानों और परियोजना से प्रभावित परिवारों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। प्रभावित परिवारों को लागू भूमि अधिग्रहण नियमों के अनुसार उचित मुआवजा एवं पुनर्वास संबंधी लाभ मिलेंगे। साथ ही, स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के माध्यम से परियोजना प्रभावित क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाएगा।

डॉ. बिंदल के बयान पर पलटवार करते हुए ज़िंटा ने कहा कि उनके बयान से स्पष्ट होता है कि भाजपा हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनते हुए नहीं देखना चाहती। भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि  आखिर वह चाहती क्या है। जब भी हिमाचल सरकार प्रदेश के हितों, प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाती है, भाजपा उसका समर्थन करने के बजाय विरोध की राजनीति क्यों करती है।

विनोद जिंटा ने कहा कि हिमाचल के हितों और हिमाचलियत से जुड़े मुद्दों पर भाजपा का रवैया बार-बार सवालों के घेरे में रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के अधिकारों और हिमाचल की हिस्सेदारी की लड़ाई लड़ी जा रही थी, तब भी भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार का साथ देने के बजाय उसका विरोध किया था।

ज़िंटा ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के बयान से भाजपा का विरोधाभासी रवैया सामने आता है। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश भाजपा के नेता इस ऐतिहासिक एमओयू के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसी समझौते को लेकर सिरमौर के किसानों और प्रभावित परिवारों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस समझौते के पक्ष में है या इसके खिलाफ। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने कार्यकाल में इस परियोजना को अंतिम रूप नहीं दे सकी। अब जब मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इसे निर्णायक दिशा दी है, तो भाजपा नेताओं की बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि उन्हें प्रदेश के हित में हो रहा यह समझौता रास नहीं आ रहा है।

विनोद ज़िंटा ने कहा कि परियोजना से हिमाचल प्रदेश को 211 मेगावाट बिजली का हिस्सा बिना उत्पादन लागत वहन किए प्राप्त होगा। परियोजना में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की समान भागीदारी तय की गई है तथा इसके तहत 50 प्रतिशत रोजगार के अवसर हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए उपलब्ध होंगे।‌ उन्होंने कहा कि इस परियोजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि हिमाचल प्रदेश को अपने जल संसाधनों से आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए भारी वित्तीय बोझ या बड़ी पूंजीगत लागत नहीं उठानी पड़ेगी। इससे प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए राज्य को दीर्घकालिक राजस्व प्राप्त होगा।

ज़िंटा ने कहा कि किशाऊ परियोजना केवल एक जल विद्युत परियोजना नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के आर्थिक भविष्य, आत्मनिर्भरता और आने वाली पीढ़ियों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण समझौता है। उन्होंने भाजपा नेताओं से आग्रह किया कि वे राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों के आधार पर प्रदेश की जनता को वास्तविक स्थिति बताएं और किसानों एवं प्रभावित परिवारों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा करने की कोशिश न करें।

By admin

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