बोले – सुक्खू सरकार वित्तीय प्रावधान और हिमाचल के जल अधिकार स्पष्ट करे
हिमाचल के दीर्घकालिक आर्थिक और जल हितों पर स्थिति करें स्पष्ट – डॉ. बिंदु
शिमला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने किशाऊ बांध परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को परियोजना के वित्तीय प्रावधानों, हिमाचल के जल अधिकारों, बिजली हिस्सेदारी और भविष्य में होने वाले आर्थिक लाभ की पूरी जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए। वे सोमवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. राजीव बिंदल ने किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री पर तथ्यों को अलग तरीके से प्रस्तुत करने और परियोजना का श्रेय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छह राज्यों के बीच 15 सितंबर को हुए समझौते से लंबे समय से लंबित परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता खुला है। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना की लागत करीब 15,624 करोड़ रुपये है और जल घटक की लागत का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी।
डॉ. बिंदल ने कहा कि भाजपा किशाऊ परियोजना और समझौते का स्वागत करती है, लेकिन प्रदेश सरकार को परियोजना की वित्तीय शर्तों, हिमाचल के जल अधिकारों और भविष्य के आर्थिक लाभों की स्थिति जनता के सामने स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना का प्रस्ताव दशकों पुराना है और लागत तथा लाभों के बंटवारे को लेकर लंबे समय तक राज्यों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
उन्होंने कहा कि परियोजना की कुल अनुमानित लागत 15,624 करोड़ रुपये है, जिसमें जल घटक करीब 12,096 करोड़ और विद्युत घटक करीब 3,528 करोड़ रुपये का है। बिंदल के अनुसार पहले विद्युत घटक की लागत में हिमाचल और उत्तराखंड की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रस्तावित थी, जिसके तहत हिमाचल पर करीब 1,764 करोड़ रुपये का दायित्व बनता था। उनका सवाल है कि यदि परियोजना से हिमाचल को बड़ी वार्षिक आय की संभावना है तो राज्य ने विद्युत घटक में स्वयं निवेश करने के विकल्प का आकलन क्यों नहीं किया।
डॉ. बिंदल ने मुख्यमंत्री के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें परियोजना से हिमाचल को करीब 1,200 करोड़ रुपये सालाना आय होने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस अनुमान का आधार सार्वजनिक करना चाहिए। इसमें बिजली की बिक्री दर, उत्पादन, हिमाचल को मिलने वाले राजस्व, संचालन लागत और अन्य वित्तीय दायित्वों का स्पष्ट विवरण होना चाहिए। मुख्यमंत्री सुक्खू ने समझौते के बाद परियोजना से करीब 1,200 करोड़ रुपये वार्षिक आय की उम्मीद जताई थी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने हिमाचल के जल अधिकारों को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि नए समझौते में हिमाचल के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान के हिस्से में दिए जाने के बदले राज्य के विद्युत घटक की लागत में सहयोग की व्यवस्था की गई है। केंद्र सरकार ने भी जून में इस व्यवस्था की पुष्टि की थी।
डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि इस व्यवस्था से हिमाचल के दीर्घकालिक जल हितों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। विशेषकर सिरमौर के किसानों की भविष्य की सिंचाई जरूरतों, पेयजल, बागवानी और कृषि विकास को लेकर स्पष्ट योजना सामने आनी चाहिए। उन्होंने परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, स्थानीय युवाओं के रोजगार और स्थानीय ठेकेदारों एवं कारोबारियों की भागीदारी के प्रावधान भी सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना केवल बिजली उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि हिमाचल के जल संसाधनों और भविष्य की आर्थिक जरूरतों से भी जुड़ी है। सरकार को परियोजना पर श्वेतपत्र जारी कर केंद्र व राज्यों के वित्तीय योगदान, जल अधिकार, बिजली से होने वाली आय, सिंचाई और रोजगार से जुड़े प्रावधानों की पूरी जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।
