शिमला। दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित छह दिवसीय 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन का शुक्रवार को समापन हुआ। सम्मेलन में राष्ट्रमंडल के 56 देशों के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समापन अवसर पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने “राष्ट्रमंडल के लिए नेतृत्व के नए अवसर: लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के लिए संसदीय कार्रवाई” विषय पर संक्षिप्त संबोधन दिया।
पठानिया ने कहा कि राष्ट्रमंडल स्वतंत्र और संप्रभु देशों का स्वैच्छिक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग, लोकतंत्र, सुशासन, मानवाधिकार, आर्थिक विकास, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक स्वरूप में राष्ट्रमंडल का औपचारिक गठन 1949 के लंदन घोषणापत्र के बाद हुआ। इसके बाद विभिन्न देशों के जुड़ने से यह एक व्यापक वैश्विक संगठन के रूप में विकसित हुआ।
उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रमंडल में अफ्रीका, एशिया, यूरोप, अमेरिका, कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र के देश शामिल हैं तथा भारत इसका एक महत्वपूर्ण सदस्य है। राष्ट्रमंडल की विशेषता यह है कि सदस्य देश आकार, जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था की दृष्टि से एक-दूसरे से काफी अलग हैं, बावजूद इसके वे साझा मूल्यों और सहयोग की भावना के आधार पर एक मंच पर आते हैं।
पठानिया ने कहा कि लोकतंत्र, मानवाधिकार, कानून का शासन, समानता और सतत विकास राष्ट्रमंडल की गतिविधियों के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने शिक्षा और युवा विकास के क्षेत्र में राष्ट्रमंडल के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रवृत्ति, कौशल विकास, युवा नेतृत्व और क्षमता निर्माण जैसे कार्यक्रम युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करते हैं। वहीं, राष्ट्रमंडल खेल सदस्य देशों के बीच मैत्री और खेल भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत के लिए राष्ट्रमंडल का महत्व विशेष है। भारत इस मंच के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, लोकतांत्रिक मूल्यों, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, व्यापार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सहयोग करता है। उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था राष्ट्रमंडल के विभिन्न कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
पठानिया ने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रमंडल के सामने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता, डिजिटल विभाजन, बेरोजगारी, वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियां और सतत विकास जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और संसाधनों का आदान-प्रदान आवश्यक है।
दक्षिण अफ्रीकी संसद का जताया आभार
पठानिया ने सम्मेलन के भव्य आयोजन और अतिथि सत्कार के लिए दक्षिण अफ्रीकी संसद का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान उन्हें कई अविस्मरणीय स्मृतियां मिली हैं, जिन्हें वे अपने साथ हिमाचल प्रदेश लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान प्राप्त अनुभवों और हिमाचल प्रदेश के हित में उपयोगी पहलुओं को प्रदेश सरकार के साथ साझा किया जाएगा।
