Spread the love

विघायकों ने 1036 सवालों पर सरकार से मांगा जवाब 

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर तक चलेगा। इस सत्र के‌ दौरान कुल 10 बैठकें होंगी। इस सत्र में एक हजार से अधिक सवाल पूछे जाएंगे। ये सवाल शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, रोजगार, प्राकृतिक आपदा, कानून व्यवस्था समेत कई‌ अन्य ज्वलंत मुद्दों से संबंधित हैं। इसके अलावा विधायकों द्वारा विभिन्न नियमों के तहत भी चर्चाएं मांगी गई हैं। ऐसे में इस सत्र के गरमागर्म रहने के आसार हैं।

 विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में मानसून सत्र की तैयारियों और सदस्यों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों की जानकारी दी। पठानिया ने कहा कि मानसून सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय को विधायकों की ओर से कुल 1036 प्रश्न प्राप्त हुए हैं। इनमें 787 तारांकित और 249 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। सभी प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा अलग-अलग नियमों के तहत भी सदस्यों ने कई सूचनाएं दी हैं। 

कुलदीप पठानिया ने बताया कि नियम 62 के तहत 13, नियम 63 के तहत 2, नियम 101 के तहत 5 और नियम 130 के तहत 15 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इन सभी को आगामी कार्रवाई और जवाब के लिए सरकार को भेज दिया गया है। प्रश्नों और सूचनाओं के लिए 18 अगस्त तक समय निर्धारित था, जबकि सत्र के दौरान अल्प सूचना के जरिए जरूरी और तात्कालिक मुद्दे भी उठाए जा सकते हैं। 

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि मानसून सत्र की शुरुआत 21 अगस्त को सुबह 11 बजे होगी। पहले दिन सदन में पूर्व विधायकों के निधन पर शोक प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके बाद सदन की नियमित कार्यवाही आगे बढ़ेगी। सत्र से पहले 20 अगस्त को शाम 4:30 बजे सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेताओं के साथ सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने पर चर्चा होगी। पठानिया ने कहा कि उनका सभी दलों के सदस्यों से आग्रह रहेगा कि सदन में रचनात्मक सहयोग दिया जाए ताकि विधानसभा के समय का सदुपयोग प्रदेशहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए किया जा सके।

शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा के मुद्दों पर ज्यादा सवाल

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सदस्यों की ओर से सबसे ज्यादा सवाल रिक्त पदों, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा से हुए नुकसान को लेकर आए हैं। शिक्षा विभाग में खासकर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में खाली पदों का मुद्दा प्रमुख है। सरकार की ओर से जिन स्कूलों को सीबीएसई के तहत लाने की प्रक्रिया अपनाई गई है, वहां शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति से जुड़े सवाल भी सदन में उठेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य संस्थानों में खाली पदों, दवाइयों की आपूर्ति, मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सुविधाओं तथा मशीनरी से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। हाल में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान को लेकर भी कई सवाल आए हैं। इनमें सड़कों, पेयजल योजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

90 फीसदी से अधिक रही विधानसभा की उत्पादकता

कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्य उत्पादकता लगातार बेहतर रही है। कई सत्रों में उत्पादकता 90 फीसदी से अधिक रही है और कुछ मौकों पर यह 100 फीसदी से भी ऊपर गई है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों की ओर से प्रदेशहित से जुड़े मुद्दे उठाए जाते हैं। प्रयास रहेगा कि सभी महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में चर्चा हो और सरकार की ओर से उनका जवाब दिया जाए।

आश्वासन समिति बनाने पर विचार

सदन में मंत्रियों की ओर से दिए जाने वाले आश्वासनों की निगरानी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में स्थायी समितियां विभागों से इन आश्वासनों पर हुई कार्रवाई की जानकारी लेती हैं। पठानिया ने कहा कि वह स्वयं भी आश्वासनों की समीक्षा कर रहे हैं। जरूरत महसूस हुई तो विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में अलग से आश्वासन समिति का गठन किया जा सकता है ताकि सदन में दिए गए आश्वासनों को लागू करवाने की निगरानी प्रभावी तरीके से हो सके।

विधायकों के खिलाफ एफआईआर पर नियम स्पष्ट

विधायकों के खिलाफ दर्ज होने वाली एफआईआर को लेकर पठानिया ने कहा कि विधानसभा के नियम स्पष्ट हैं। किसी विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक की ओर से उसकी प्रति विधानसभा को भी भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित विधायक गिरफ्तार होता है तो नियमों के तहत निलंबन की कार्रवाई होती है। वहीं जमानत मिलने की स्थिति में मामला अपनी न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे चलता रहता है।

विशेषाधिकार और याचिका मामलों पर भी कार्रवाई

कुलदीप पठानिया ने कहा कि विशेषाधिकार मामलों को लेकर कुछ मामले अभी लंबित हैं और विशेषाधिकार समिति उन्हें देख रही है। कई मामलों में जवाब मिलने के बाद मामले सुलझ भी जाते हैं। याचिका समिति के कामकाज की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में याचिकाएं समिति के पास आई हैं और इनमें से करीब 75 याचिकाओं का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है। 

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *