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दिल्ली हिंसा में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, सरकारी संपत्ति को नुकसान

हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर हो देशद्रोह सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई : भाजपा

शिमला। भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को उपायुक्त कार्यालय, सीटीओ चौक, शिमला के बाहर विशाल धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के निकट कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी तथा अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के विरोध में आयोजित किया गया।

धरने में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बलबीर वर्मा, पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, राजीव सैजल, प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल, प्रदेश उपाध्यक विनोद कुमार, रश्मिधर सूद, सचिव संजय ठाकुर, कुसुम सदरेट, प्रमोद ठाकुर, प्रेम ठाकुर, प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा, प्रत्याशी संजय सूद, रवि मेहता, के एल ठाकुर, परमजीत पम्मी, चेतन बरागटा, पुरुषोत्तम गुलेरिया, रमा ठाकुर, सुदीप महाजन, प्यार सिंह कंवर, जिला अध्यक्ष अरुण फालटा, रतन पाल, जिला पदाधिकारी, सभी मंडल अध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

धरने को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बलबीर वर्मा ने कहा कि देश में लोकतंत्र प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार देता है, लेकिन लोकतंत्र की आड़ में देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं, प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को चुनौती देना किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास देश के सबसे संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्रों में शामिल है, जहां बिना अनुमति इस प्रकार का प्रदर्शन करना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। दिल्ली पुलिस द्वारा कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया जाना इसी बात का प्रमाण है कि कानून सबके लिए समान है। 

बलबीर वर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार स्वयं को संविधान और लोकतंत्र का सबसे बड़ा रक्षक बताने का प्रयास करती है, लेकिन जब कानून और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की बात आती है तो वही कांग्रेस सबसे पहले नियमों को तोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सामान्य नागरिक या अन्य संगठन प्रधानमंत्री आवास के बाहर इसी प्रकार का प्रदर्शन करता तो कांग्रेस सबसे पहले कानून का हवाला देती, किंतु अपने नेताओं के मामले में उसका दोहरा चरित्र उजागर हो गया है। 

उन्होंने कहा कि दिल्ली में जिस आंदोलन को कांग्रेस ने खुला समर्थन दिया, वह बाद में हिंसक घटनाओं में बदल गया। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया तथा 15 से 20 सरकारी वाहन एवं अन्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। यह किसी लोकतांत्रिक आंदोलन का नहीं, बल्कि अराजकता का उदाहरण है। 

बलबीर वर्मा ने कहा कि घायल पुलिसकर्मियों में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी ड्यूटी निभाते हुए गंभीर चोटें झेलीं। पुलिस पर पथराव करना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और हिंसा फैलाना किसी भी लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, उन्हें सबसे पहले लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। 

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उन तत्वों का समर्थन किया जिन्होंने राजधानी दिल्ली का माहौल बिगाड़ा। उन्होंने कहा कि जिस तथाकथित “कॉकरोच आंदोलन” को छात्रों और युवाओं के नाम पर चलाया गया, उसे वामपंथी विचारधारा से जुड़े समूहों और राजनीतिक दलों ने अपने हितों के लिए प्रयोग करने का प्रयास किया। भाजपा का मानना है कि छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समाधान संवाद से होना चाहिए, न कि हिंसा, अराजकता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर। 

बलबीर वर्मा ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने अपने समर्थकों को उग्र बनाने का कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि जो लोग पुलिस पर हमला करते हैं, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं और संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देते हैं, उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी संगठन इस प्रकार की अराजकता फैलाने का साहस न कर सके। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध की पक्षधर रही है, लेकिन हिंसा, अराजकता और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केवल एक राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं और उनकी सुरक्षा से समझौता पूरे राष्ट्र की सुरक्षा से समझौता है।

बलबीर वर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए कि उसके नेताओं ने राजधानी दिल्ली में ऐसा वातावरण बनाया, जिससे पुलिसकर्मी घायल हुए, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। भाजपा ने मांग की कि हिंसा में शामिल सभी व्यक्तियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

By admin

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