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शिमला। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सोमवार को लोकभवन में प्रो. विवेकानन्द तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय कला, लोक परंपरा एवं संगीत में गंगा का प्रवाह’ का विमोचन किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि भारत के लोगों के लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि देश की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समय के साथ गंगा का मार्ग और स्वरूप बदलता रहा है, लेकिन वह हमेशा जीवनदायिनी नदी के रूप में हमारी सभ्यता का पालन-पोषण करती रही है।

राज्यपाल ने कहा कि गंगा शाश्वतता और पवित्रता का प्रतीक है तथा भारतीय कला, साहित्य, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं में उसका विशेष स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक पीढ़ियों के कवियों, कलाकारों और विद्वानों ने गंगा से प्रेरणा लेकर अपनी रचनाओं को समृद्ध किया है। इसी कारण गंगा भारत की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न हिस्सा बन गई है।

राज्यपाल ने कहा कि गंगाजल आज भी हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों और जीवन के विभिन्न संस्कारों में अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय कला में गंगा को एक दिव्य देवी और संरक्षक के रूप में चित्रित किया गया है, जो पवित्रता, करुणा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।

प्रो. विवेकानन्द तिवारी को पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को भारतीय कला, लोक परंपराओं और संगीत पर गंगा के गहरे प्रभाव को समझने में मदद करेगी तथा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और जागरूकता को बढ़ाएगी। 

By admin

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