वन्यजीवों के बढ़ते आतंक पर हिमाचल किसान सभा ने उठाए सवाल
शिमला। हिमाचल किसान सभा ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हिमाचल प्रदेश वन्यजीव बोर्ड के पुनर्गठन का स्वागत किया है। साथ ही संगठन ने बोर्ड के गठन और राज्य में बढ़ती वन्यजीव समस्या को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं।
सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के सबसे बड़े किसान जनसंगठन हिमाचल किसान सभा को नवगठित बोर्ड में गैर-सरकारी सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वन्यजीव बोर्ड में सभी हितधारकों, विशेषकर किसान संगठनों, को उचित प्रतिनिधित्व मिले, क्योंकि वन्यजीवों के बढ़ते हमलों से सबसे अधिक प्रभावित किसान वर्ग ही है।
डॉ. तनवर ने मांग की कि हिमाचल प्रदेश वन्यजीव बोर्ड की नियमित और त्वरित बैठकें आयोजित की जाएं। संगठन का कहना है कि बोर्ड की पहली प्राथमिकता वन्यजीव हमलों से प्रभावित किसानों, परिवारों और अन्य व्यक्तियों को मिलने वाले मुआवजे में तत्काल संशोधन होना चाहिए। इसमें फसलों के नुकसान, जान-माल की हानि, घायल व्यक्तियों के उपचार तथा पालतू पशुओं पर हमलों के मामलों में दी जाने वाली सहायता राशि को वर्तमान बाजार दरों और वास्तविक खर्च के अनुसार बढ़ाया जाए।
उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2005 से प्रदेश में वन्यजीवों के बढ़ते आतंक के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रही है। किसान सभा और खेती बचाओ आंदोलन से जुड़े संगठनों के संघर्ष और दबाव के कारण ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन कर बंदरों को अनुसूची-5 में शामिल किया गया तथा उनकी संख्या नियंत्रण के लिए कार्रवाई की अनुमति दी गई, जिसे प्रदेश में तीन बार लागू किया गया। इसके बावजूद प्रदेश में जंगली सूअर, मोर और लंगूरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं सिरमौर, सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जैसे सीमावर्ती जिलों में नीलगाय की समस्या भी गंभीर रूप धारण कर चुकी है, जिससे किसानों की फसलें भारी नुकसान झेल रही हैं।
डॉ. कुलदीप सिंह तनवर ने राज्य सरकार से यह भी मांग की है कि सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से तत्काल आंकड़े एकत्रित किए जाएं, क्योंकि रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन 100 से अधिक बंदरों और आवारा कुत्तों के काटने के मामले सामने आ रहे हैं। संगठन ने इसे गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बताते हुए सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
डॉ. तनवर ने प्रस्ताव रखा कि हिमाचल प्रदेश वन्यजीव बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सभी हितधारकों, किसान संगठनों, वन्यजीव विशेषज्ञों, वन विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की एक संयुक्त बैठक बुलाएं, ताकि प्रदेश में बढ़ती वन्यजीव समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान निकाला जा सके।
