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शिमला। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति और शिमला नागरिक सभा ने वीरवार को कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) की गायनी ओपीडी को आईजीएमसी में शिफ्ट करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ाई गई शुल्क वृद्धि के खिलाफ आईजीएमसी परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने आईजीएमसी की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर से मुलाकात कर उनके माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को ज्ञापन प्रेषित किया।

ज्ञापन में राज्य सरकार से मांग की गई कि महिलाओं के अस्पताल के ओबीजी (स्त्री एवं प्रसूति रोग) विभाग का विभाजन न किया जाए और इसे नियमित रूप से कमला नेहरू अस्पताल में ही संचालित रखा जाए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है, जिसके चलते भारी-भरकम शुल्क आम जनता पर डाले जा रहे हैं। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इलाज से वंचित हो सकते हैं।

प्रदर्शन के दौरान यह भी मांग उठाई गई कि यदि सरकार महिलाओं को रोबोटिक सर्जरी की सुविधा देना चाहती है, तो यह सुविधा भी कमला नेहरू अस्पताल में ही उपलब्ध कराई जाए। वक्ताओं ने कहा कि महीने में यदि एक-दो मरीजों को रोबोटिक सर्जरी की आवश्यकता होती है, तो उन्हें आईजीएमसी भेजा जा सकता है, लेकिन इसके नाम पर केएनएच जैसे स्थापित महिला अस्पताल की सेवाओं को कमजोर करना उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि ओबीजी के छात्रों को पढ़ाई के लिए बार-बार आईजीएमसी और केएनएच के बीच आना-जाना पड़ेगा, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। साथ ही, स्टाफ की कमी के चलते आईजीएमसी में गायनी ओपीडी को सुचारू रूप से चलाना भी मुश्किल होगा।

धरने को जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट, राज्य सचिव फालमा चौहान, राज्य कमेटी सदस्य सुनिधि, शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष जगमोहन ठाकुर, सचिव विवेक कश्यप, छात्र नेता अनिल ठाकुर और मजदूर नेता वीरेंद्र सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। इन सभी ने एक स्वर में सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं और आम जनता में इस फैसले को लेकर भारी आक्रोश है, क्योंकि केएनएच में एक ही छत के नीचे बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि आईजीएमसी में इन सुविधाओं का अभाव है। 

वक्ताओं ने स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ाई गई शुल्क वृद्धि को भी तुरंत वापस लेने की मांग की। इस दौरान आईजीएमसी प्रशासन ने आश्वासन दिया कि बढ़े हुए शुल्कों और अनियमितताओं पर बैठक में चर्चा की जाएगी। 

प्रदर्शनकारियों ने हिमकेयर कार्ड योजना को आम जनता के लिए राहतकारी बताते हुए कहा कि इसकी वर्तमान व्यवस्था जटिल होने के कारण लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह आभा कार्ड योजना को भी सरल बनाने की मांग उठाई गई, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके, न कि अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़े।

प्रदर्शन में शिमला के पूर्व महापौर संजय चौहान, सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और किसान नेता जयशिव सहित कई लोग उपस्थित रहे।

मुख्य मांगें: 

केएनएच की गायनी ओपीडी और संबंधित विभाग को यथावत रखा जाए।

कमला नेहरू अस्पताल में ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए भवन का निर्माण कर आईवीएफ व रोबोटिक सर्जरी उपलब्ध कराई जाए।

एंटीनेटल और गायनी ओपीडी का विभाजन न किया जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ाई गई शुल्क वृद्धि तुरंत वापस ली जाए।

अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को भरा जाए।

चमियाना के लिए बेहतर यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

आभा कार्ड को सरल बनाया जाए।

हिमकेयर कार्ड की व्यवस्था को सुचारू किया जाए।

संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

By admin

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