धर्मशाला। पर्यटन सोसाइटी के तत्वावधान में, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के पर्यटन, यात्रा एवं आतिथ्य प्रबंधन विद्यालय में सोमवार को विश्व पर्यटन दिवस 2025 विषय – पर्यटन और सतत रूपांतरण के सप्ताह भर चलने वाले समारोह का शुभारंभ हुआ। इसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलसचिव प्रो. नरेंद्र सांख्यान उपस्थित और यात्रा, पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन स्कूल के डीन प्रो. सुमन शर्मा उपस्थित रहे।
विश्व पर्यटन सप्ताह समारोह में आज का मुख्य आकर्षण सिग्नेचर वॉल था, जहां छात्रों और शिक्षकों ने स्थिरता और सफाई के लिए सामूहिक स्वच्छता शपथ लेने के साथ-साथ “केवल हरे पदचिह्न छोड़ने की शपथ ली। इस वर्ष का वैश्विक थीम, जिसे संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन ने घोषित किया है, पर्यटन और सतत रूपांतरण है। अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि पर्यटन केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति का सम्मान करने, संस्कृति के प्रति गर्व जगाने और सामाजिक समावेश सुनिश्चित करने का माध्यम भी है। प्रो. प्रदीप कुमार ने प्राचीन काल से ही यात्रा और पर्यटन के महत्व पर प्रकाश डाला और तीर्थाटन, देशाटन और पर्यटन से लेकर आधुनिक पर्यटन तक की यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के इंजन के रूप में सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और विरासत पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया, उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे “रिड्यूस, रीयूज़, रीसाइकल” के मंत्र को जीवन में उतारें और अपने कौशल को निरंतर निखारने, पुनः अर्जित करने और उन्नत करने की प्रक्रिया को अपनाएँ। उन्होंने कहा, “प्रकृति में हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सब कुछ है, लेकिन हमारी लालसा को पूरा करने के लिए नहीं। अतः पर्यटन और आतिथ्य जगत को चाहिए कि वह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण करे।” साथ ही स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजनाओं के माध्यम से सांस्कृतिक संवर्धन, बुनियादी ढाँचे के विकास और विकसित भारत @2047 के विजन के लिए सरकार की पहलों को भी रेखांकित किया।
अपनी दूरदर्शी अंतर्दृष्टि प्रदान करते हुए, विशेष अतिथि प्रो. नरेंद्र सांख्यान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पर्यटन एक आर्थिक गतिविधि से कहीं अधिक है। समारोह में इस बात पर भी बल दिया गया कि पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास का, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र का भी प्रमुख वाहक है। इस क्षेत्र को चाहिए कि वह सतत विकास और ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना में अग्रणी भूमिका निभाए। गहन अनुभवों के उदाहरण देते हुए, उन्होंने स्वास्थ्य पर्यटन, कृषि पर्यटन और कृषि पद्धतियों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया, जो न केवल आगंतुकों की संतुष्टि को बढ़ाते हैं और उनके प्रवास को बढ़ाते हैं, बल्कि स्थानीय आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण, प्रकृति संरक्षण और स्थिरता को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने ग्रामीण-से-शहरी प्रवास को रोकने और संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में अवसर पैदा करने में पर्यटन की क्षमता पर भी प्रकाश डाला।
अपने धन्यवाद ज्ञापन में, अधिष्ठाता पर्यटन, यात्रा एवं आतिथ्य प्रबंधन विद्यालय प्रो. सुमन शर्मा ने यूएनडब्ल्यूटीओ 2025 की थीम: “सतत परिवर्तन के लिए पर्यटन” के अनुरूप सप्ताह भर चलने वाली गतिविधियों की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रमुख पहलों में शामिल हैं: गोद लिए गए गाँव में वृक्षारोपण, स्थानीय समुदायों और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से प्राकृतिक जल निकायों में स्वच्छता अभियान। प्लास्टिक मुक्त परिसर अभियान का शुभारंभ।
आगामी सप्ताह भर में आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों में विरासत यात्रा (Heritage Trail) प्रमुख आकर्षण होगी, जिसके माध्यम से छात्र और प्रतिभागी स्थानीय ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेंगे। इसका उद्देश्य समुदाय-आधारित विरासत पर्यटन के महत्व को रेखांकित करना है। इस यात्रा से छात्रों को यह अनुभव मिलेगा कि किस प्रकार विरासत संरक्षण पहचान और अर्थव्यवस्था दोनों को सुदृढ़ करता है। सांस्कृतिक गतिविधियों के अंतर्गत छात्र नुक्कड़ नाटक (Street Plays) प्रस्तुत करेंगे, जिनके विषय होंगे—कचरा प्रबंधन, पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली और जिम्मेदार यात्रा। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य सततता का संदेश केवल कक्षाओं तक सीमित न रखकर समुदाय तक पहुँचाना और स्थानीय समाज के साथ सार्थक संवाद स्थापित करना है।
