मुख्यमंत्री से तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाकर राहत एवं पुनर्वास कार्यों को तेज करने की भी रखी मांग
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पिछले दो महीने से लगातार हो रही वर्षा और हाल ही के चार दिनों की भारी बारिश ने प्रदेश को गहरे संकट में धकेल दिया है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी ने इस आपदा पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह प्राकृतिक त्रासदी पूरे प्रदेश में भारी तबाही मचाकर गई है। पार्टी ने प्रदेशवासियों से इस कठिन घड़ी में साहस व धैर्य से काम लेने का आह्वान किया है और मुख्यमंत्री से मांग की है कि तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाकर राहत एवं पुनर्वास कार्यों को तेज किया जाए।
सीपीएम राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण अपने दम पर इस आपदा से निपटना असंभव है। इसलिए केंद्र सरकार को इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर कम से कम 5000 करोड़ रुपये की फौरी राहत उपलब्ध करानी चाहिए ताकि राहत एवं पुनर्वास कार्य शुरू किए जा सकें।
15,000 करोड़ का अनुमानित नुकसान, 368 मौतें
संजय चौहान ने कहा कि प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार अभी तक केवल सरकारी विभागों को ही 3500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। जबकि सरकारी व निजी संपत्तियों को मिलाकर यह नुकसान 15,000 करोड़ रुपये से भी अधिक आंका जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक इस आपदा में 368 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, 14,000 से अधिक मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। करीब 65,000 पशुधन की मौत हुई है। कृषि व बागवानी क्षेत्र को भी 1700 करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
सड़कें टूटीं, संचार बाधित, जनजीवन अस्त-व्यस्त
सीपीएम नेता ने कहा कि आज लगभग पूरा प्रदेश आपदाग्रस्त घोषित हो चुका है। राज्य की अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे कई क्षेत्र एक-दूसरे से कट गए हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने से मोबाइल नेटवर्क व अन्य संचार सेवाएं भी ठप हो गई हैं। कई इलाकों में खाद्य वस्तुओं व अन्य आवश्यक सामानों की किल्लत की सूचनाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में कर्मचारियों की कमी के कारण बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की बहाली का कार्य सुचारू ढंग से नहीं हो पा रहा है।
सेब आर्थिकी पर संकट, किसानों की फसल सड़ने लगी
संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश में इस समय सेब सीजन अपने चरम पर है, लेकिन राष्ट्रीय उच्च मार्ग और संपर्क मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से बागवानों को भारी परेशानी हो रही है। फसल मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही और खेतों या सड़कों पर ही सड़ रही है। प्रदेश की सेब आर्थिकी, जो करीब 6000 करोड़ रुपये की है, बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है।
चौहान ने मांग की कि केंद्र सरकार त्वरित प्रभाव से मण्डी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) लागू करे और राज्य सरकार के साथ मिलकर एक नोडल एजेंसी तय करे। उन्होंने यह भी मांग की कि प्रदेशभर में एमआईएस केंद्र खोलकर ए ग्रेड सेब 80 रुपये प्रति किलो, बी ग्रेड 60 रुपये प्रति किलो और सी ग्रेड 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीद शुरू की जाए।
राहत कार्यों के लिए टास्क फोर्स की मांग
सीपीएम के राज्य सचिव ने प्रदेश सरकार से मांग की कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित किया जाए, जो सभी प्रशासनिक अधिकारियों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर राहत व पुनर्वास कार्य सुनिश्चित करे। इसमें राशन, पानी, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी राज्य कमेटी ने अपनी सभी इकाइयों को प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों में जुटने के निर्देश दिए हैं। संजय चौहान ने कहा कि यदि किसी को भी किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता है तो वह पार्टी की स्थानीय कमेटियों से संपर्क कर सकता है। पार्टी इस आपदा की घड़ी में हर संभव सहायता का प्रयास करेगी।
