शिमला। हिमाचल प्रदेश में सेब के बागवान इस समय गहरी परेशानी से जूझ रहे हैं। अल्टरनेरिया और मार्सोनिना जैसी फफूंदजनित बीमारियां सेब बागानों में तेज़ी से फैल रही हैं, जिससे भारी नुकसान की आशंका है। इस गंभीर स्थिति को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता चेतन बरागटा ने गहरी चिंता जताई है।
बरागटा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने बागवानों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। पिछले वर्ष भी ऐसी ही स्थिति पैदा हुई थी। उम्मीद थी कि सरकार इससे सबक लेगी और इस बार बेहतर तैयारी करेगी, लेकिन अफसोस कि न तो कोई रोकथाम हुई और न ही कोई असरदार कदम उठाया गया। उन्होंने सरकार से कई अहम सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि बागवानी मंत्री और विभाग आखिर कर क्या रहे हैं? नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अब तक इस बीमारी पर कोई ठोस शोध क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि यदि समय रहते वैज्ञानिक समाधान ढूंढा गया, तो आज हजारों बागवानों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
बरागटा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उद्यान केंद्रों की हालत बदतर हो गई है। ज़रूरी दवाइयां समय पर उपलब्ध नहीं करवाई जा रहीं, जिससे बागवानों को मंहगे दामों पर ओपन मार्केट से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इससे न सिर्फ उत्पादन पर असर पड़ रहा है, बल्कि बागवानों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
चेतन बरागटा ने तंज करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री, जो स्वयं बागवानी क्षेत्र से जुड़े हैं, इस विषय पर पूरी तरह चुप हैं। बागवानों को उनसे कोई उम्मीद नहीं दिख रही। बरागटा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आग्रह किया कि वे तुरंत बागवानी विभाग के साथ आपात बैठक बुलाएं और उद्यान केंद्रों में जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाएं। साथ ही, वैज्ञानिक संस्थाओं को शोध कार्य के लिए सक्रिय किया जाए ताकि भविष्य में बागवानों को इस तरह की समस्याओं से न गुजरना पड़े।
