शिमला। हिमाचल प्रदेश में बस किराया वृद्धि के खिलाफ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक प्रदेश सरकार बस किराए में की गई भारी-भरकम वृद्धि को पूरी तरह वापस नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। सीपीआईएम ने अब इस आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाने का निर्णय लिया है।
माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि सरकार द्वारा की गई यह वृद्धि न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि जनविरोधी नवउदारवादी नीतियों का नतीजा है, जिससे आम जनता पहले ही त्रस्त है। उन्होंने कहा कि पहले न्यूनतम बस किराया 5 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये किया गया-जो सीधे तौर पर 100 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके बाद और 15 प्रतिशत किराया बढ़ा दिया गया, जिससे यह पड़ोसी राज्यों से भी महंगा हो गया।
स्कूल बस किराए में तीन गुना वृद्धि, आम आदमी पर डाला गया शिक्षा टैक्स
संजय चौहान ने स्कूल बस पास दरों में की गई बढ़ोतरी को शिक्षा पर हमला करार दिया। उन्होंने बताया कि पहले 600 से 1000 रुपये मासिक के बीच जो किराया था, उसे तीन गुना तक बढ़ा कर 1800 से 2500 रुपये कर दिया गया। जनता के भारी विरोध के बाद सरकार ने थोड़ी राहत की घोषणा की, लेकिन फिर भी वृद्धि करीब 100 प्रतिशत बनी हुई है। जबकि आम बस में एक दिन का खर्च 20 से 40 रुपये आता है, वहीं स्कूल बसों में यह खर्च 72 से 121 रुपये रोज तक पहुंच गया है।
एचआरटीसी को जानबूझकर घाटे में डाल रही सरकार, निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप
सीपीआईएम के राज्य सचिव संजय चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर हिमाचल पथ परिवहन निगम को घाटे में डाल रही है। राज्य में एचआरटीसी के पास मात्र 2500 रूट बचे हैं, जबकि 8300 से अधिक रूट निजी बस ऑपरेटरों को दे दिए गए हैं। लाभदायक रूट निजी हाथो में सौंपकर सुक्खू सरकार परिवहन निगम को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि परिवहन निगम में न नई बसें खरीदी जा रही हैं और न स्टाफ की भर्ती की जा रही है।
वॉल्वो पर मेहरबानी, जनता पर सख्ती – टैक्स चोरी करने वाली कंपनियों पर नहीं हो रही कार्रवाई
राज्य सचिव संजय चौहान ने आरोप लगाया कि मनाली, शिमला, धर्मशाला जैसे पर्यटक स्थलों पर रोजाना चलने वाली सैकड़ों बसें बिना अनुमति और टैक्स के चलाई जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन कंपनियों को किसकी छत्रछाया में संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता पर टैक्स थोपने की बजाय इन कंपनियों से टैक्स वसूली करे।
चौहान ने कहा कि सरकार ने यदि उनकी मांगें न मानी तो उग्र आंदोलन होगा। उन्होंने सरकार से साफ शब्दों में कहा कि न्यूनतम किराया 10 से घटाकर 5 रुपये किया जाए, 15 प्रतिशत की वृद्धि तुरंत वापस ली जाए, स्कूली बस पास की दरें पूर्ववत की जाएं, समान पर लिए जा रहे अतिरिक्त किराये को हटाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इन मांगों को तुरंत नहीं माना गया तो पार्टी पूरे प्रदेश में जनता को लामबंद कर उग्र आंदोलन छेड़ेगी।
