20 मई को एक और बड़ा किसान-मजदूर धरना प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान
शिमला। हिमाचल किसान सभा, सेब उत्पादक संघ और शिमला नागरिक सभा के संयुक्त तत्वावधान में किसानों की बेदखली, ढारों के विध्वंस और ताला बंदी के खिलाफ सोमवार को डीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में किसान, मजदूर और नागरिक शामिल हुए।
इस आंदोलन की अगुवाई किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने की। उनके साथ इसमें विजेंद्र मेहरा, जगत राम, फ़लमा चौहान, जयशिव ठाकुर, विवेक कश्यप, जगमोहन ठाकुर, डॉ. विजय कौशल, जगदीप पंवर, प्रताप चौहान, कपिल नेगी, रंजीव कुठियाला, कपिल शर्मा, राकेश सलमान, पंकज, भूमि, हीरानंद शांडिल, हिमी देवी, हेमराज चौधरी, सुनील वशिष्ठ और राम सिंह प्रमुख रहे। आंदोलन का आह्वान करते हुए किसान सभा ने घोषणा की कि 20 मई को एक और बड़ा किसान-मजदूर धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार संघर्ष किया जाएगा।
डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों को वर्षों से जोत रहे सरकारी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है। सरकार न तो रोजगार दे पा रही है और न ही खेती कर अपना जीवन यापन कर रहे किसानों को सुरक्षा दे रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2002 में तत्कालीन धूमल सरकार ने 20 बीघा जमीन के नियमतिकरण के लिए 50 रुपये में फार्म भरवाए थे, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ, बल्कि किसानों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमे भी शुरू कर दिए गए।
डॉ. तंवर ने मांग की कि सरकार तुरंत सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाकर वन संरक्षण कानून 1980 में संशोधन के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए ताकि हिमाचल की जनता को राहत दी जा सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल की लगभग 67 प्रतिशत भूमि केंद्र सरकार के अधीन है, ऐसे में भूमि हीनों और आपदा से उजड़े किसानों को जमीन देने में भी दिक्कत आ रही है।
शिमला नागरिक सभा से विवेक कश्यप ने शहर में ढारों को तोड़ने और रेहड़ी फड़ी वालों को उजाड़ने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार बिजली, पानी और टैक्स तो वसूल रही है, लेकिन गरीबों के आश्रय स्थल उजाड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले किए वादों को सरकारें सत्ता में आते ही भूल जाती हैं।
जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि चाहे भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस की, दोनों ने ही चुनावी वादों को निभाने में विफलता दिखाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी गरीबों और किसानों को संगठित होकर एक बड़ा राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ना होगा ताकि बेदखली और जमीन से जुड़े मुद्दों पर सरकार को झुकाया जा सके।
