कहा – ब्यास नदी की का चैनलाईजेशन के नाम पर हुई लूट तो क्यों ख़ामोश रही सरकार
शिमला। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश में आई भीषण आपदा के प्रभावितों को इस बार भी वही पैकेज मिलना चाहिए, जो पिछली बरसात के दौरान प्रभावितों को मिला था। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए मकान के लिए 7 लाख रुपए तथा भूमिहीनों को जमीन देने सहित कई अन्य बातें कही गई थी और उन पर अमल करते हुए सरकार तुरंत राहत प्रदान करे। वे सोमवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछली बरसात में जिन आपदा प्रभावितों को 7 लाख रुपए देने की बात कही थी, उनमें से कुछ को 1 किस्त और कई लोगों को कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की तरफ से घोषित पैकेज में अधिकांश हिस्सा केंद्र सरकार से मिली आर्थिक मदद का था। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित सभी जगहों पर राहत और बचाव कार्य और तेज करने की आवश्यकता है, जिससे लापता लोगों को जल्दी से जल्दी तलाशा जा सके। साथ ही सभी प्रभावितों को तत्काल सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सहयोग कर रही है और आगे भी करेगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से जब वे मिले तो उनके पहले शब्द ही यही थे कि हिमाचल को क्या हो गया। इस बार भी इतनी बड़ी त्रासदी चिंता का विषय है। उन्होंने हर प्रकार से प्रदेश के सहयोग का भरोसा दिया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने पिछले साल के हादसे से कोई सबक़ नहीं सीखा। पिछले साल ब्यास में आई त्रासदी के बाद कई जगह पर बजरी और रेता जमा होने से ब्यास की धारा में परिवर्तन हो गया था, जिसे सही करने के लिए सरकार ने टेंडर जारी किए। उन्होंने कहा कि सरकार ने बहुत सारा पैसा मलबे को हटाने के लिए खर्च किया। टेंडर लेने वालों ने करोड़ों रुपए की बज़री और रेता बेचकर कमाए, लेकिन ब्यास की हालत जस की तस ही रही। ब्यास इस बार फिर उसी पुराने ढर्रे पर बह रही है, जिससे नुक़सान होने की संभावना बहुत ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि इतना सब कुछ होता रहा लेकिन सरकारी महकमें ने इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के बजाय आंखे बंद कर ली। यह आंखें क्यों बंद की गई, इसके पीछे कौन से लोग ज़िम्मेदार हैं। मुख्यमंत्री को स्वयं इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्यास की परिवर्तित धारा की वजह से जो नुक़सान होगा, उसके लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ सरकार ज़िम्मेदार है।
समस्याओं का समाधान करने के बजाय हिमकेयर बंद करना हल नहीं
इलाज रोकने के बजाय घोटाला करने वालों पर कार्रवाई करे सरकार
उधर, नेता प्रतिपक्ष ने हिम केयर को निजी अस्पतालों में बंद करने के सवाल के जवाब में कहा कि मुख्यमंत्री संवेदनहीन बातें कर रहे हैं। यदि किसी निजी अस्पताल में किसी तरह का घोटाला हुआ है तो सरकार उसके ख़िलाफ क़ानून के तहत कार्रवाई करे। मॉनिटरिंग की व्यवस्था को और मज़बूत करे और कठोर कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि यदि प्रक्रिया में कहीं कोई ख़ामी है तो उसे और पारदर्शी बनाया जाए, लेकिन मौजूदा सरकार को बंद करने में ही सुख मिलता है। यदि किसी व्यवस्था में कोई ख़ामी है, तो उससे दुरुस्त किया जाता है। सरकारी अस्पताल में कितनी लंबी लाइनें हैं। एमआरआई और सीटी-स्कैन के लिए छ: महीने के बाद की तारीख़ें मिल रही हैं। जिस मरीज़ को तत्काल इलाज की आवश्यकता होगी तो क्या वह सरकारी अस्पताल के महीनों बाद की तारीख़ों का इंतज़ार करेगा या जहां पर उसे इलाज मिलेगा, वहीं पर अपना इलाज करवाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ फ़ैसले लेते वक़्त सरकार को संवेदनशीलता दिखानी होती है, लेकिन मुख्यमंत्री ने नहीं दिखाई। उन्होंने एक बार भी नहीं सोचा कि किसी बीमारी से परेशान मरीज़ को इस फ़ैसले से कितनी परेशानी उठाने पड़ेगी।
