बुटेल ने कहा कि यह मेला 500 वर्ष पूर्व सुकेत रियासत के राजाओं द्वारा प्रारंभ किया गया था, जिसकी पारम्परिक पहचान आज भी कायम है, जिसे संजोए रखने के लिए सुन्दरनगर के निवासी बधाई के पात्र है। उन्होने कहा कि प्राचीन काल में सुन्दरनगर के नलवाड़ मेले को उत्तरी भारत के सबसे बड़े पशु मेले का गौरव प्राप्त था, लेकिन आज के युग में खेती में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग हो रहा है तथा खेती के लिए मैदानी क्षेत्रों में ट्रैक्टरों का प्रयोग किया जा रहा है वाबजूद इसके नलवाड़ मेले ने अपने स्वरूप को बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसान, बागवानों तथा पशु पालकों के कल्याण के लिए कई नई योजनाएं क्रियान्वित कर रही है। इस वर्ष के बजट में किसानों व बागवानों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि के समग्र विकास के लिए “हिम उन्नति” योजना को शुरू करने का निर्णय लिया है। यह योजना क्लस्टर अप्रोच के आधार पर चलाई जायेगी, जिसमें प्रथम चरण में पूरे प्रदेश में क्लस्टर चिन्हित किए जायेंगे। इस नई योजना के अन्तर्गत प्रत्येक क्लस्टर में स्थानीय जलवायु, भौगोलिक परिस्थितियों जैसे मृदा के प्रकार इत्यादि के आधार पर कम से कम 40 बीघा भूमि शामिल की जायेगी। प्रथम चरण में आगामी वित वर्ष में योजना पर 150 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रावधान है।
इस अवसर पर पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए नलवाड़ मेले के अतीत तथा वर्तमान स्वरूप केबारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। मेला कमेटी के अध्यक्ष, एसडीएम धर्मेश रामोत्रा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सात दिवसीय नलवाड़ मेले के बारे मेंविस्तार से जानकारी प्रदान की। इसके उपरांत मुख्यातिथि ने विकासात्मक प्रदर्शनियों का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर नरेश चौहान, चंपा ठाकुर, ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हेमंत शर्मा, महासचिव चुन्नीलाल, नगर परिषद के अध्यक्ष जितेंद्र सहित विभिन्न गणमान्य लोग उपस्थित थे।
