शिमला। हिमाचल प्रदेश के हजारों बागवान शुक्रवार को राजधानी शिमला में गरजे। शिमला में राज्य सचिवालय के बाहर बागवानों का विशाल प्रदर्शन कर अपनी मांगों को सुलझाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया। इस दौरान पुलिस से भी उनकी हल्की झड़प हुई। इससे पहले बागवानों ने नवबहार से राज्य सचिवालय तक आक्रोश रैली निकाली। गुस्साए बागवानों ने बागवानी मंत्री और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। बागवानों का यह प्रदर्शन देरशाम समाप्त हुआ।
राजधानी शिमला में बारिश के बावजूद भारी संख्या में बागवान आक्रोश रैली में पहुंचे। बागवान सचिवालय के बाहर धरना स्थल पर भी बारिश में छाता लिए डटे रहे। इस प्रदर्शन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुई। प्रदर्शन करने वालों में अधिकतर 45 साल से कम आयु वर्ग का युवा है, जो सेब की खेती को पेशे के तौर पर अपना रहे हैं और उनमें खासा आक्रोष दिखा। प्रदर्शन के कारण लोगों को भी दिक्कत झेलनी पड़ी। क्योंकि संजौली से छोटा शिमला की तरफ यातायात बंद था।
बागवानों की यह प्रदर्शन संयुक्त किसान मंच के बैनर तले आयोजित किया गया। भाजपा को छोड़ अन्य सभी दलों ने इस प्रदर्शन को अपने समर्थन का ऐलान किया था। जुब्बल-कोटखाई से कांग्रेस विधायक रोहित ठाकुर, रोहड़ू से विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, कांग्रेस उपाध्यक्ष हरीश जनारथा, जिला शिमला कांग्रेस अध्यक्ष अतुल शर्मा समेत कई नेता इस प्रदर्शन में पहुंचे थे।
बागवानों में महंगे कार्टन और कृषि पर लागत बढ़ने से जोरदार रोष है। ठियोग के बागवान महेंद्र वर्मा ने बताया कि मोदी सरकार ने कृषि को कमाई का जरिया बना दिया है। कुछ साल पहले तक कृषि इनपुट पर कोई टैक्स नहीं लगता था। मोदी सरकार ने पहले इसे जीएसटी के दायरे में लाया। अब साल दर साल इसमें बढ़ोतरी की जा रही है। यही वजह है कि 2019 में 40 से 52 रुपए में मिलने वाला कार्टन इस साल 65 से 85 रुपए पहुंच गया है। इसी तरह दो से अढ़ाई रुपए में मिलने वाली ट्रे इस बार चार से पांच रुपए की हो गई है।
उधर, छैला निवासी बागवान दिनेश वर्मा ने बताया कि एक पेटी को तैयार करने पर 400 से 500 रुपए की लागत आ रही है। बागवानों का जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि यदि कृषि में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, खाद बीच और दवाइयों की कीमतों को नियंत्रित नहीं किया गया तो 5000 करोड़ रुपए का सेब उद्योग तबाह हो जाएगा। इसे बचाने के लिए उन्हें मजबूरी में सड़कों पर उतरना पड़ा है।
लाखों परिवारों की रोजी रोटी पर आएगा संकट – सोहन ठाकुर
सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने बताया कि यदि सेब उद्योग को बर्बाद होने से नहीं बचाया गया तो अढ़ाई लाख से ज्यादा परिवारों की रोजी रोटी पर संकट आ जाएगा। उन्होंने बताया कि बागवान कभी किसी से कुछ नहीं मांगता, बल्कि दर्जनों लोगों को अपने बगीचों में रोजगार देता है। फिर भी केंद्र व राज्य सरकार इस उद्योग को बर्बाद करने पर तुली हुई है।
ठियोग के बागवान संदीप वर्मा ने बताया कि बागवान सड़कों पर है और हिमाचल सरकार के बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर भूमिगत हैं। उन्होंने एक बार भी बागवानों से बातचीत करना उचित नहीं समझा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भी बागवानों के मुद्दों को लेकर कितने गंभीर है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है हजारों बागवान सचिवालय आ रहे है और मुख्यमंत्री ने यहां रुकना भी उचित नहीं समझा
CM को सौंप रखा है 20 सूत्रीय मांगपत्र
बागवानों ने मुख्यमंत्री को 20 सूत्रीय मांग पत्र सौंप रखा है। इसमें से चार से पांच मांगे मान ली गई है लेकिन ज्यादातर मांगों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। इन्हीं मांग को लेकर बागवान पहले भी ठियोग, रोहड़ू, नारकंडा, आनी, कोटखाई, चौपाल इत्यादि सेब बहुल क्षेत्रों में कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।
संयुक्त किसान मंच के अनुसार कृषि इनपुट पर उपदान खत्म करने, जीएसटी लगाने से खाद, बीज, दवाइयां, कृषि औजार और कार्टन की कीमतें दो से तीन साल में दोगुना हो गई है, जबकि बागवानों को फसल का दाम आज भी 10 साल पहले वाला ही मिल रहा है। इससे सेब की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है।
निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे बागवान: संजय चौहान
संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि बागवान अपनी 5 हजार करोड़ की एप्पल इंडस्ट्री को बचाने के लिए बागवान लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार है। अब निर्णय सरकार को करना है कि बागवानों की मांगें कितनी जल्दी पूरी करती है। उन्होंने बताया कि इससे पहले बागवानों ने 1987 और 1990 में ऐसे बड़े आंदोलन लड़े हैं। इस बार फिर से ऐसी ही निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
बागवान बताएंगे सरकार को अपनी ताकत – राकेश सिंघा
ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सरकार पर बागवानों की अनदेखी भारी पड़ने वाली है और आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार को इसका जवाब मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि बागवान सेब का तुड़ान करने के बजाय खेत-खलियान छोड़कर सड़कों पर उतर आया है। इसलिए सरकार को अब बागवानों के सामने झुकना पड़ेगा।
