शिमला। वाराणसी के एक 64 वर्षीय रोगी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि वह पार्किंसंस रोग से पीड़ित था। उसके हाथों और सिर में कंपन, बोलने में कठिनाई, अंगों की जकड़न और खराब संतुलन तथा समन्वय जैसे लक्षण स्पष्ट हो रहे थे। वह दवाओं को भी अधिक रिस्पांस नहीं कर रहा था और उसके लक्षण लगातार बढ़ रहे थे, जबकि उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से बाधित कर रहा था।
लेकिन फोर्टिस अस्पताल मोहाली की न्यूरो-मॉड्यूलेशन टीम में शामिल डॉ. अनुपम जिंदल, एडिशनल डायरेक्टर, न्यूरो सर्जरी, डॉ. निशित सावल और डॉ. विवेक गुप्ता, एडिशनल डायरेक्टर, इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी की टीम ने इस मरीज की डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) सर्जरी कर उसे इस बीमारी से निजात दिलाई।
डॉ. निशित सावल ने कहा कि इस मरीज की अच्छी रिकवरी हुई है और रोगी के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ तथा रोग से संबंधित लक्षण कम होने लगे। धीरे-धीरे उनकी जिंदगी पटरी पर लौट आई और आज वह सामान्य जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीप ब्रेन स्टिमुलेशन में इलेक्ट्रल इम्पल्सज (विद्युत आवेग) उत्पन्न करने के लिए मस्तिष्क के अंदर इलेक्ट्रोड लगाना शामिल है, जो मस्तिष्क में प्रभावित कोशिकाओं और रसायनों के उपचार में मदद करता है। सर्जरी पार्किंसंस रोग के रोगियों में मोटर जटिलताओं में काफी सुधार करती है।
डॉ. सावल ने कहा कि डीबीएस पार्किंसंस रोग से पीडि़त रोगियों के लिए एक वरदान है। उन्होंने कहा कि ‘‘डीप ब्रेन स्टिमुलेशन पार्किंसंस रोग के रोगियों में मोटर जटिलताओं में काफी सुधार कर सकता है। सर्जरी के बाद हाथों और सिर में कंपन और चलने में कठिनाई जैसे लक्षण कम हो जाते हैं।’’
उन्होंने कहा कि इसी बीमारी का दूसरा रोगी हरियाणा का एक 65 वर्षीय व्यक्ति, पिछले आठ वर्षों से पीड़ित था। उनकी बीमारी काफी एडवांस्ड अवस्था में थी और उन्हें चलने के लिए सचमुच अपने पैर खींचने पड़ते थे। रोगी की डीबीएस सर्जरी हुई, जिसके बाद उसके स्वास्थ्य में सुधार हुआ और पार्किंसंस रोग से संबंधित लक्षण कम हो गए। उन्होंने कहा कि फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली उत्तर भारत (एनसीआर के बाहर) का एकमात्र अस्पताल है जो डीबीएस के माध्यम से पार्किंसंस रोग, डायस्टोनिया, आवश्यक झटके और गतिभंग के इलाज के लिए 24 घंटे 7 दिन सुविधाएं प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि फोर्टिस मोहाली एनसीआर के बाहर एकमात्र निजी अस्पताल भी है, जिसमें एक समर्पित मूवमेंट डिसऑर्डर क्लिनिक है, जो हर शनिवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित किया जाता है, जहां एक न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और न्यूरो-रेडियोलॉजिस्ट की एक टीम कंपकंपी, मूवमेंट में असंतुलन, हंटिंगटन में कोरिया, डायस्टोनिया आदि लक्षणों वाले रोगियों का विस्तार से मूल्यांकन करती है। इस मौके पर डॉ. विवेक गुप्ता भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि पार्किंसंस रोगियों के लिए यह तकनीक वरदान है और इसकी सफलता पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है।
