Spread the love

शिमला। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता देवेन्द्र बुशैहरी ने कहा है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने जिस नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र को लेकर राहुल गांधी से जो सवाल पूछे हैं और उसे लेकर मीडिया में गलत आंकड़े पेश करके जनता को गुमराह कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष को राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाए, यदि उनके पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि इसमें कोई मनी लांड्रिंग हुई है तो अपने शपथ पत्र लेकर ईडी के समक्ष प्रस्तुत करे। 

बुशैहरी ने कहा कि भाजपा को यह मालूम होना चाहिए कि नेशनल हेराल्ड वो समाचार पत्र है जिस की स्थापना 1937 में हुई और जिसे पढ़ते ही अंग्रेज हुकूमत में खलबली मच जाती थी। क्योंकि यह अख़बार गुलामी के उस दौर में आज़ादी के दीवानों का साथी था। इससे भारतीयों के लिए आज़ादी की आवाज सीमाओं के बाहर से भी होने लगी और अंग्रेज हुकूमत पर उसका दबाव भी बनाता रहा। 

बुशैहरी ने कहा कि 2015 में मोदी सरकार में एक शिकायत दर्ज करके ईडी ने मामले की पूरी जांच की, परन्तु कुछ भी हाथ नहीं लगा, जिसके कारण फाइल को बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि 2018-19 में ईडी ने इस मामले को फिर खोला और भाजपा अध्यक्ष को यह मालूम होना चाहिए कि 2018 वह साल था, जब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर सत्ता हासिल की थी। अब इस बार फिर से इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को सम्मन भेजा गया। ऐसे में यह साफ है कि यह सब उदयपुर चिंतन शिविर के तुरन्त बाद हुआ है, जहां “भारत जोड़ो” का नारा देकर कांग्रेस ने खुद को जिंदा करने का संकेत दिया था। 

देवेंद्र बुशैहरी ने कहा कि दरअसल आजादी के बाद समय के साथ नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र घाटे में जाने लगा था। इस संकट से उभरने के लिए कांग्रेस ने साल 2002 से साल 2011 के दौरान इसे 90 करोड़ रुपए का कर्ज लिया। इस राशि में से 67 करोड़ रुपए नेशनल हेराल्ड ने अपने कर्मचारियों को वेतन और VRS का भुगतान करने के लिए उपयोग किया। नॉन फॉर-प्रॉफिट की अवधारणा पर स्थापित किसी भी कंपनी के शेयर धारक/प्रबंध समिति के सदस्य कानूनी रूप से कोई लाभांश, लाभ, वेतन या अन्य वित्तीय लाभ नहीं ले सकते हैं। इसलिए सोनिया गांधी, राहुल गांधी या यंग इंडियन में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी भी प्राप्ति या वित्तीय लाभ का प्रश्न ही नहीं उठता। जब ऐसा हुआ ही कुछ नहीं तो क्राइम कैसा। 

बुशहरी ने कहा कि ये सब भाजपा इन एजेंसियों को अपने विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल करके इनका दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष को चाहिए कि वे प्रदेश में अपनी सरकार के मुख्यमंत्री से पूछे कि प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उनकी सरकार ने क्या कदम उठाए। पुलिस पेपर लीक मामले में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले का क्या हुआ, क्यों नहीं अभी तक मुख्य आरोपी पकड़ा गया। मुख्यमंत्री ने 21 मई से पहले कह दिया था कि मामला सीबीआई को सौंप दिया है। आज एक महीना होने जा रहा है अभी तक क्यों नहीं सीबीआई, जबकि गुड़िया केस में तीन दिन बाद सीबीआई शिमला पहुंच गई थी। मुख्यमंत्री जिनके पास गृह विभाग भी है, इस प्रदेश की जनता से इस मामले में झूठ बोल रहे हैं कि मामला सीबीआई को भेज दिया है। नई पुलिस भर्ती परीक्षा करवा कर ये सरकार इस मामले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है, कांग्रेस पार्टी कतई ऐसा होने नहीं देगी। 

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *