शिमला। हिमाचल में स्वास्थ्य विभाग में कोरोना संकट के बीच हुए कथित लेन-देन को लेकर कांग्रेस का हिमाचल सरकार पर हमला जारी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव व विधायक विक्रमादित्य सिंह ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर हमला बोला है और कहा है कि जैसी नैतिकता डॉ. राजीव बिंदल ने दिखाई है, ठीक वैसी ही नैतिकता सीएम को भी दिखानी चाहिए और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
विक्रमादित्य सिंह ने यहां प्रेस कांंफ्रेंस में कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राजीव बिंदल ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा देकर पूरे मामले में कुंदन बनकर बाहर आने की बात कही है। ऐसे में अब मुख्यमंत्री को भी ऐसा ही करना चाहिए। उनका कहना था कि सीएम के पास स्वास्थ्य और गृह विभाग है और ऐसे में विजिलेंस इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इसलिए ही कांग्रेस की मांग है कि इस मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाई जाए और यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो कांग्रेस हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में हुए स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार ने हिमाचल प्रदेश की देशभर में बदनामी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों ने संकट के समय में दिल खोल कर मदद की है, लेकिन इस पैसे का दुरूपयोग किया जा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में हुए प्रकरण की कड़ी निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कथित भ्रष्टाचार मामले की विजिलेंस सही जांच नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अधिकारियों पर पकड़ कमजोर है। मुख्यमंत्री कहते कुछ हैं और अधिकारी करते कुछ हैं।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को कोरोना संकट के कारण परेशानी झेल रहे पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की मदद करने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यटन कारोबार पूरी तरह से कोरोना के कारण प्रभावित हुआ है। इस कारोबार से करीब दो लाख लोग जुड़े हैं और उनकी मदद करना सरकार का दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि वे होटल कारोबारियों की समस्याओं को लेकर सीएम से मिले थे और इनकी समस्याओें को उनके समक्ष रखा था।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश में सेब सीजन शुरू होनेे वाला है। लेकिन बागवानों को लेबर की भारी कमी से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार नेपाली मजदूरों को लानेे के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि सेब सीजन से पहले मजदूरों की समस्या का समाधान किया जाए, ताकि 4-5 हजार करोड़ रूपए की सेब आर्थिकी प्रभावित न हो और बागवानों को भी कोई दिक्कत न हो।
