शिमला। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा है कि आज के दिन हम सब बाबासाहब की जीवनी को पढ़ने का संकल्प लें। उन्होंने देश व समाज को जो विचार व दिशा दी, उसके लिए हम सब उनके कृतज्ञ हैं। वे सोमवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में डॉ. बीआर अम्बेडकर पीठ द्वारा आयोजित डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बोल रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में हमे डॉ. अम्बेडकर को समझने की जरूरत है, क्योंकि उनका जीवन और जीवन का संघर्ष हमें प्रेरणा देता है। उनका जीवन जन्म से मृत्यु तक संघर्षमय रहा और यह संघर्ष उन्होंने इसलिए किया, ताकि आने वाला समय हम सब के लिए सुखमय हो। उन्होंने बाबा साहब के जीवन से जुड़े अनेक प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि वे सही अर्थों में हिन्दू समाज के सुधारक थे।
राज्यपाल ने कहा कि डॉ. आंबेडकर को संविधान निर्माता के तौर पर जाना जाता है। वह समाज सुधारक और विद्वान थे। उनके विचार और आदर्श करोड़ों लोगों को लगातार प्रेरणा देते हैं। उन्होंने हमारे राष्ट्र के लिए जो भी सपने देखे हैं उन्हें पूरा करने के लिए हमे प्रतिबद्धता से कार्य करना है और यही बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार ने कहा कि बाबा साहब ने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि यह विडम्बना है कि राजनीतिक व्यवस्था ने उन्हें एक वर्ग के नेता के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि उन्होंने समाज के हर वर्ग के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने षिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्श करो की तीन उपाये दिए, लेकिन पहले दो को भी यदि व्यवहार में लाया जाए तो तीसरे की आवष्यकता ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक कुरीतियों को मन से निकालें और समरसता से रहें तभी यह देष पुनः विष्वगुरू बन सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री किस्मत कुमार ने कहा कि तथ्य और तर्क का नाम था अम्बेडकर जिनके बारे में चिंतन और मंथन करने से कर्तव्य का बोध होता है। उन्होंने कहा कि डॉ अम्बेडकर ने विदेशी धरती से आए किसी भी धर्म को स्वीकार नहीं किया जबकि उन्हें अनेक प्रलोभन मिले। उन्होंने हिन्दू समाज में जाति विषमताओं को दूर करने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने डॉ अम्बेडकर द्वारा समाज को दिए गए योगदान का विस्तृत वर्णन किया और उनके बाल्यकाल के अनेक प्रसंगों का चित्रण किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने आंतरिक समस्याओं और चुनौतियों को दूर करने के लिए जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि आज हमें समाज को जोड़ने की बात करनी चाहिए और आचरण मे भी यह भाव होना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश डॉ. बीआर अम्बेडकर पीठ के अध्यक्ष आचार्य विकास ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। श्यामा प्रसाद मुखर्जी पीठ के अध्यक्ष आचार्य श्रीराम शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके पश्चात, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में जलपान व भोजन सुविधा के लिए कैफेटेरिया का उद्घाटन भी किया।
