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शिमला। राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को विशेष अधिमान दे रही है, जिसके फलस्वरूप महिला सशक्तिकरण में हिमाचल प्रदेश देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बन कर उभरा है। प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को खाद्य सुरक्षा तथा आजीविका के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश में मुख्यमंत्री एक बीघा योजना क्रियान्वित की जा रही है। 

इस योजना प्रदेश में महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। इस योजना का लाभ उठाकर महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हो रही है। जिला सिरमौर के राजगढ़ खंड के शिरगुल महाराज स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाकर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ किया है। यह योजना उनके लिए वरदान सिद्ध हुई है। अदरक के औषधीय गुणों को देखते हुए यह स्वयं सहायता समूह अदरक की खेती करना चाहता था, लेकिन धन की कमी उनके इस कार्य में बाधा बन रही थी। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जब मुख्यमंत्री एक बीघा योजना के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने राजगढ़ विकास खंड में जाकर इस योजना के लिए आवेदन किया। 
इस योजना से मिली आर्थिक सहायता का उपयोग कर इस समूह की महिलाओं ने बंजर पड़ी भूमि को उपजाऊ भूमि में परिवर्तित  कर अदरक की खेती की शुरुआत की। इस स्वयं सहायता समूह की मेहनत रंग लाई और उनके सात सदस्यों के इस समूह ने हिम ईरा साप्ताहिक बाजार में 50 हजार रुपए के अदरक की बिक्री की। अपने पहले प्रयास पर मिली सफलता से उत्साहित होकर अब इस स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मूली की खेती की है और शीघ्र ही हिम ईरा साप्ताहिक बाजार में यह बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी। इस स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने महज 7-8 महीनों के भीतर जैविक खेती को अपनाकर इन उत्पादों को बाजार में उपलब्ध करवाया है। यह स्वयं सहायता समूह प्रदेश की अन्य स्वयं सहायता समूहों को प्रगति का मार्ग दिखा रहा है। प्रदेश में शिरगुल महाराज स्वयं सहायता समूह का सफल उदाहरण इस बात का प्रतीक है कि सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही मुख्यमंत्री एक बीघा योजना किस प्रकार महिलाओं के जीवन में खुशहाली ला रही है। यह छोटी सी शुरुआत लम्बी विकास यात्रा का आगाज है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 21 मई, 2020 को इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के साथ-साथ उन्हें बैकयार्ड किचन गार्डनिंग के लिए प्रशिक्षित करना है। यह योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और मनरेगा के बीच एक अभिसरण योजना है तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बने स्वयं सहायता समूह की कोई भी महिला सदस्य इस योजना का लाभ उठा सकती है। इस योजना के अन्तर्गत स्वयं सहायता समूह एक लाख रुपये का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए महिला के पास मनरेगा जाॅब कार्ड होना आवश्यक है। प्रदेश में मनरेगा और स्वच्छ भारत मिशन का अनुसरण कर ग्रामीणों को किचन गार्डनिंग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं किचन गार्डन के विकास से पोषण युक्त सब्जियों और फलों का उत्पादन कर खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ उत्पादित उत्पादों को खुले बाजार में बेचकर आर्थिक लाभ अर्जित कर रही है।
इस योजना के तहत प्रदेश में भूमि सुधार, नर्सरी उत्पादन, फलदार वृक्षारोपण, केंचुआ खाद गढा निर्माण, अजोला पिट निर्माण, सिंचाई और जल संचयन संरचना निर्माण और गौशाला निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 2020-21 में इस योजना के तहत 11,254 कार्य स्वीकृत किए गए, जिनमें से 1,690 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। योजना के तहत प्रदेश में अब तक विभिन्न कार्यों पर लगभग 17.91 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। वहीं, वर्ष 2021-22 के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस योजना के तहत 2281 कार्य स्वीकृति किए गए, जिनमें से 1045 का कार्य आरम्भ किए जा चुका है और चालू वित्त वर्ष में अब तक 852 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। प्रदेश में इस वर्ष अब तक 4 करोड़ 25 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। 

By admin

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