सुंदरनगर। मंडी जिले के उपमंडल के तहत सीनियर सेकेंडरी स्कूल छम्यार की दीवार पत्रिका बाल उद्यान के नए अंक का विमोचन स्कूल के प्रधानाचार्य चांद राम ने किया। जहां प्रदेश अपना स्वर्णिम जयंती समारोह मना रहा है, वहीं पूरे देश में अमृत महोत्सव के अंतर्गत कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में हिमाचल में अपने सफऱ को निरंतर गतिशील बनाए रखने वाली एकमात्र दीवार पत्रिका बाल उद्यान ने कोरोना के इस मुश्किल दौर में भी यह अंक निकाला है। यह एक सामान्य अंक है। पत्रिका के विमोचन के दौरान स्कूल के विद्यार्थी और समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
बच्चों का भी रहा सहयोग
इस अंक के विद्यार्थी संपादक गीतांजलि और प्रीति तथा उप संपादक सुमन और कोमल हैं। चारों ही विद्यार्थी 12वीं कक्षा की कला संकाय की छात्राएं हैं। इन बेटियों के कुशल संपादन में यह अंक तैयार हुआ है। इस अंक के रचनाकार सारिका, वर्षा, तनीषा, दीक्षा, गगन, पालक ठाकुर, रितिका ठाकुर, वर्षा, कोमल, हरिप्रिया, कशिश, विजय लक्ष्मी, रूपाली, गुंजन, याचना, प्रीति, गीतांजलि, पायल ठाकुर, नम्रता, चंचल, जिज्ञासा, मुस्कान और सुमन हैं।
बाल उद्यान का इतिहास
स्कूल में इस पत्रिका की शुरुआत और परिकल्पना युवा साहित्यकार व शिक्षक पवन चौहान ने की थी। वे हिन्दी के प्रवक्ता हैं और इस पत्रिका में मार्गदर्शक के रूप में कार्य कर रहे हैं। छ यार स्कूल में इसकी शुरुआत 15 नवंबर 2019 को हुई थी। बाल उद्यान के प्रथम अंक की शुरुआत एक सामान्य अंक से हुई जो देशभर में काफी चर्चा में रहा। उसके बाद बर्फ और पहाड़ तथा लॉकडाउन विशेषांक के रूप में अंक तैयार हुए। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान भी इस पत्रिका ने कोरोनावरियर्स को समर्पित लॉकडाउन विशेषांक को डिजिटल रूप में प्रकाशित कर इतिहास रचा था और यह हिमाचल की पहली डिजिटल दीवार पत्रिका बन गई थी।इस डिजिटल अंक के चलते पत्रिका को खूब विस्तार मिलाथा।
बाल उद्यान ने बढ़ाई हिंदी साहित्य के प्रति रुचि
विद्यार्थी बाल उद्यान के लिए कविता, कहानी, पेंटिंग, आलेख, लोककथा, लघुकथा, साक्षात्कार अपने तथा बुजुर्गों के अनुभवों आदि रचते हैं। इन बच्चों की चुनिंदा रचनाएं देशभर की हिन्दी की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं जो पूरे हिमाचल के लिए गर्व की बात है। इसमें बाल उद्यान का अहम रोल है। यह पत्रिका लेखन के जरिए बच्चों को आमजन से भी जोड़ रही है। अच्छा लिखने हेतु यही बच्चे फिर पठन की अपनी इस इच्छा को विद्यालय के पुस्तकालय में पूरा करते हैं।
क्या है दीवार पत्रिका
दीवार पत्रिका या भित्ति पत्रिका बच्चों का वह रचनात्मक प्लेटफार्म है, जिसमें बच्चे अपने अनुभवों, संस्मरणों व मन में चल रही उथल पुथल और अपनी संवेदनाओं को साहित्य की विभिन्न विधाओं के जरिएरचते हैं। जानकारी के अनुसार यह पत्रिका भारत में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में प्राइमरी स्कूल से लेकर कॉलेज तक विद्यार्थियों के माध्यम से कई वर्षों से नियमित तैयार की जा रही हैं। यह वह पत्रिका है जो विद्यार्थियों की रचनाओं के सहयोग से विद्यार्थियों द्वारा ही तैयार की जाती है। विद्यार्थियों की रचनाओं को किसी बड़ी शीट पर चिपकाकर इस पत्रिका को दीवार पर टांग दिया जाता है। बच्चे आतेण्जाते या खाली समय में इस पत्रिका को पढ़ सकते हैं। इस पत्रिका द्वारा विद्यार्थी बहुत नजदीकी से अपने विषय के साथ भी जुड़ जाता है और जिस विषय को लेकर वह अपने विचारों को रखता है वह ताउम्र उसे याद रहता है।

