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केलांग।  अब दुनिया के किसी भी कोने से बैठकर श्रद्धालु जनजातीय लाहौल-स्पीति जिला के ऐतिहासिक त्रिलोकीनाथ मंदिर के दर्शन कर सकेंगे। त्रिलोकीनाथ मंदिर प्रबंधन कमेटी ने मंदिर की वेबसाइट लांच कर दी है। इस वेबसाइट में मंदिर के बारे में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध है। इसके साथ ही इसी वेबसाइट के माध्यम से श्रद्धालु मंदिर में दान भी ऑनलाइन दे सकेंगे। आगामी कुछ दिनों के भीतर यह सुविधा शुरू हो जाएगी। इससे संबंधित कार्य अंतिम चरण में है। यही नहीं, अब मंदिर में होने वाली हर पूजा अर्चना को ऑनलाइन फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर भी दिखाया जाएगा, ताकि श्रद्धालु घर बैठे ऑनलाइन दर्शन कर सकें। जिलाधीश नीरज कुमार ने बताया कि मंदिर की वेबसाइट लांच कर दी है। मंदिर में ऑनलाइन दान की सुविधा भी शुरू की जा रही है। फेसबुक, यूट्यूब के माध्यम से लाइव दर्शन दिखाए जाएंगे।

ऐसे कर सकेंगे दान 

श्रद्धालु को दान करने के लिए त्रिलोकीनाथ मंदिर की वेबसाइट पर जाना होगा। इसी में पे नाऊ का ऑप्शन आएगा, जहां पर आपको क्लिक करना होगा। इसके बाद फोन पे, गूगल पे और पेटीएम का ऑप्शन आएगा। दान करने वाला व्यक्ति इन तीनों ऑप्शन में से किसी भी ऑप्शन का इस्तेमाल करके धन राशि दान कर सकता है।  

Offical YouTube link:- https://youtube.com/channel/UCHl_NoptsIuUv64gRK672RQ  

Offical Facebook page link :- https://www.facebook.com/profile.php?id=100071642882510

Official website :- https//triloknathtemple.com


लाहौल-स्पीति जिले में चंद्रभागा नदी के बाएं छोर पर उदयपुर के सामने त्रिलोकीनाथ मंदिर है। उदयपुर कई चीजों के लिए अलग और मशहूर है। साल में लगभग 6 महीने बर्फ से ढके रहने वाली इस जगह पर माइनस 25 डिग्री सेल्सियस तक तापमान चला जाता है। समुद्र तल से 2,742 मीटर की ऊंचाई पर बसे उदयपुर छोटी सी आबादी वाला यह इलाका त्रिलोकीनाथ मंदिर के लिए भी मशहूर है। यह मंदिर भी बेहद खास है। इस मंदिर में हिंदू भी पूजा करते हैं और बौद्ध धर्म के अनुयायी भी। दुनिया में शायद यह इकलौता मंदिर है, जहां एक ही मूर्ति की पूजा दोनों धर्मों के लोग एक साथ करते हैं। अगस्त के महीने में त्रिलोकीनाथ के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। क्योंकि इस महीने में पौरी मेला आयोजित होता है, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं। पौरी मेला त्रिलोकीनाथ मंदिर और गांव में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला तीन दिनों का भव्य त्यौहार है, जिसमें हिंदू और बौद्ध दोनों बड़े उत्साह के साथ शामिल होते हैं। इस पवित्र उत्सव के दौरान सुबह-सुबह, भगवान को दही और दूध से नहलाया जाता है और लोग बड़ी संख्या में मंदिर के आसपास इकट्ठा होते हैं और ढोल नगाड़े बजाए जाते हैं। इस त्यौहार में मंदिर के अन्य अनुष्ठानों का पालन भी किया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान शिव इस दिन घोड़े पर बैठकर गांव आते हैं। इसी वजह से इस उत्सव के दौरान एक घोड़े को मंदिर के चारों ओर ले जाया जाता है। एक भव्य मेला भी आयोजित किया जाता है।

By admin

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