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शिमला। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर ने कहा है कि बागवानों को राम भरोसे छोड़ कर सरकार का सारा ध्यान उप-चुनाव पर ही केंद्रित है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि वह सेब बागवानी को बचाने के लिए केंद्र सरकार से उठाए, ताकि बागवानों को राहत मिल सके। 

रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब उद्योग पर आए संकट से उभरने के लिए जम्मू-कश्मीर की तर्ज़ पर हिमाचल में भी नेफेड के माध्यम से सेब विपणन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वर्ष 2019 से नेफेड के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के बागवानों का सेब ख़रीद रही है जिससे बागवानों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नेफेड ए ग्रेड सेब 60 रुपए, बी ग्रेड 44 रुपए और सी ग्रेड 24 रुपए प्रति किलो ख़रीद रहा है। उन्होंने कहा कि सेब उद्योग पर आए संकट को देखते हुए प्रदेश सरकार हिमाचल के बागवानों का सेब नेफेड के माध्यम से विपणन करने बारे मामला केंद्र सरकार से उठाएं। 

ठाकुर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव में सेब को विशेष उत्पाद श्रेणी का दर्ज़ा दिलाने व सेब पर आयात शुल्क तीन गुना बढ़ाने की बात की थी। सेब को विशेष उत्पाद की श्रेणी में शामिल करना तो दूर की बात है‌। इसके विपरीत सेब पर जो आयात शुल्क 50 फीसदी प्रतिशत हुआ करता था, मोदी सरकार ने उसे घटाकर 15 फीसदी प्रतिशत कर दिया है। इसके चलते अब विदेशों से सस्ते दामों में सेब आयात होगा और प्रदेश के बागवानों को भारी आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सितम्बर माह में ईरान से सेब आयात होना है। उन्होंने प्रदेश के सेब उद्योग को बचाने के लिए ईरान सहित अन्य देशों से सेब के आयात पर तुरन्त रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सेब उद्योग को प्राथमिकता देते हुए ईरान, मध्य एशिया देशों सहित अन्य देशों से सेब आयात पर रोक लगाने का मामला केंद्र सरकार से उठाएं। 

रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार एमआईएस के तहत बागवानों से 9.50 रुपए में सेब ख़रीद रही है, जबकि परवाणु विक्रय केंद्र में इसे मात्र 1 रुपए की दर से बेचा जा रहा है, जिससे मंडियों में सेब के दाम लगातर गिरते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह एमआअईएस के सेब का विक्रय होता रहा तो बाज़ार में सेब के दाम बढ़ने की सभी संभावनाएं ख़त्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सेब के दामों में हुई एकाएक गिरावट से बागवान को सेब पर लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे सेब की खेती घाटे का सौदा साबित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालातों को देखते हुए सरकार को एमआईएस के तहत सेब के समर्थन मूल्य 9.50 रुपए को और बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।

अदानी द्वारा ज़ारी सेब के दामों पर तुरन्त हस्तक्षेप करे सरकार – रोहित

रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब की उत्पादन लागत बढ़ती जा रही हैं। फफूंदनाशक-कीटनाशक दवाइयां महंगी, सेब पैकिंग सामग्री के मूल्यों में 25-30 फीसदी की वृद्वि, पेट्रोल-डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी के चलते भाड़े में भी अतिरिक्त वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत में अप्रत्याशित वृद्वि हुई है और इसके बावजूद भी अदानी ग्रुप इस वर्ष  10 साल पहले निर्धारित किए गए दामों पर बागवानों से सेब ख़रीद रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हस्तक्षेप कर उच्चाधिकारियों और अदानी प्रबंधन की उच्च स्तरीय बैठक करवाएं, जिसमें बागवानों के हित में फ़ैसला लिया जा सके।

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