शिमला। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कोरोना संक्रमण से हुई मौतों का जयराम सरकार डेथ ऑडिट कराए। उनका कहना है कि इससे दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। कोविड-19 के अलावा मृत्यु की मूल वजह डेथ ऑडिट से सामने आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कोरोना के दौरान ड्यूटी करने के आंकड़े भी सरकार सार्वजनिक करे।
सुक्खू ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान डॉक्टरों ने कितनी सर्जरी की हैं, भाजपा सरकार को यह भी बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि डेथ ऑडिट इसलिए जरूरी हो गया है, क्योंकि कोरोना संक्रमित अनेक लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद अस्पतालों में उन्हें गंभीर बीमारियों का इलाज ही नहीं मिला। विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों के पास तक नहीं गए। इससे किसी की मौत कैंसर से हुई तो कोई किडनी, लीवर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप की बीमारी व ह्दयघात से मृत्यु को प्राप्त हुए। उन्हें कोरोना हुआ था, इसलिए सभी मौतों को महामारी में ही गिना गया।
सुक्खू ने आरोप लगाया कि कोरोना मरीजों के इलाज में कोविड अस्पतालों में गंभीर लापरवाही बरती गई। मरीजों की वरिष्ठ डॉक्टरों ने सुध ही नहीं ली। अनेक संक्रमित तो कोरोना के खौफ से ही मर गए। ऐसे में अस्पतालों में उनकी काउंसलिंग होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों का उचित इलाज किया जाता तो अनेक पीड़ितों की जान बच सकती थी, क्योंकि कोरोना की तो कोई दवा नहीं थी। उन्होंने कहा कि गंभीर रोगों के रोगी कोरोना संक्रमित होने पर अन्य दवाओं के लिए तड़पते रहे। उन्होंने सरकार से यह भी जानना चाहा कि वैक्सीन की पहली डोज के बाद कितने लोगों की मौत हुई और दोनों डोज लगने के बाद कितने लोग मृत्यु को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि डेथ ऑडिट में इसका भी अध्ययन हो कि वैक्सीन लगने के बाद मौत का क्या कारण रहा।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर का अंदेशा जताया हुआ है, जिसमें बच्चों के अधिक संक्रमित होने की बात कही है। बावजूद इसके प्रदेश सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे है। उनका कहना था कि न तो बच्चों के लिए विशेष वार्ड का प्रबंध अस्पतालों में किया गया है, न ही बच्चों के वेंटिलेटर मंगवाए गए हैं। सरकार को तुरंत इसकी व्यवस्था करनी चाहिए।
